रानीगंज :- कोलकाता के तारातला में एक निर्माणाधीन कारखाने की छत गिरने से लापता हुए रानीगंज (लायकबांध, 3 नंबर धौड़ा) के निवासी नवीन सिंह (44) का शव आखिरकार मिल गया है। हादसे के बाद से ही उनकी पत्नी नेहा देवी, बड़ा बेटा प्रिंस और भांजी सिमरन उनकी तलाश में कोलकाता की सड़कों और अस्पतालों के चक्कर काट रहे थे। आखिरकार एसएसकेएम अस्पताल के मुर्दाघर में जब एक क्षत-विक्षत शव आया, तो चेहरे से उसकी पहचान करना नामुमकिन था। लेकिन नवीन के हाथ पर बने एक टैटू को देखकर उनके परिवार ने रोते हुए शव की शिनाख्त की।

इस हादसे ने न केवल एक मासूम परिवार के मुखिया को छीना, बल्कि उनके पूरे घर-संसार को भी उजाड़ कर रख दिया है। नवीन अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे, जिनके कंधों पर बीमार बुजुर्ग पिता, पत्नी और तीन छोटे-छोटे बच्चों की जिम्मेदारी थी। हादसे की खबर मिलते ही उनके घर में कोहराम मच गया और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

नवीन की मौत से उनके हंसते-खेलते परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके बुजुर्ग पिता जवाहर सिंह, जो बिहार के मुंगेर में एक मंदिर में पुरोहित का काम करते हैं, इस उम्र में अपने इकलौते बेटे को खोकर पूरी तरह टूट चुके हैं। नवीन के पीछे उनकी पत्नी नेहा, दसवीं में पढ़ने वाला बड़ा बेटा प्रिंस, सातवीं की छात्रा कोमल और तीसरी कक्षा का छोटा बेटा आर्यन रह गए हैं। मासूम बच्चों को तो अब तक यह भी नहीं पता कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।


नवीन की पत्नी नेहा देवी ने कारखाने के मालिकों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि एक तरह से सोची-समझी हत्या है। मालिक और ठेकेदार अच्छी तरह जानते थे कि नीचे का ढांचा मजबूत नहीं है और पूरी संरचना बहुत कमजोर मिट्टी पर टिकी है। इसके बावजूद इतने दिनों से बंद पड़े कारखाने के ऊपर कंक्रीट की ढलाई का काम क्यों करवाया जा रहा था? नेहा ने रोते हुए बताया कि नवीन अक्सर उन्हें फोन पर वीडियो दिखाकर बोलते थे कि वे कितनी खतरनाक परिस्थितियों में जान जोखिम में डालकर काम करते हैं। उन्होंने नवीन को काम छोड़कर घर लौटने को भी कहा था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

नवीन अपने पूरे परिवार में कमाने वाले इकलौते सदस्य थे। उनकी मौत से पूरे परिवार का भविष्य अंधकार में डूब गया है। रोती-बिलखती नेहा ने कहा कि घर में बुजुर्ग ससुर और तीन नाबालिग बच्चे (प्रिंस- 10वीं, कोमल- 7वीं और आर्यन- तीसरी कक्षा) हैं। अब हमारा संसार कैसे चलेगा ? मुझे पता चला है कि सरकार मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये की सहायता देगी, लेकिन हमसे अभी तक किसी ने संपर्क नहीं किया है। नेहा ने सरकार से गुहार लगाई है कि पैसों के साथ-साथ उन्हें कोई छोटा-मोटा काम भी दिया जाए, ताकि वे अपने बच्चों का पेट पाल सकें और इस मुश्किल घड़ी से उबर सकें।