West Bengal में SIR प्रक्रिया के तहत अब तक Voter List से 27 लाख से अधिक नाम हटे !

कोलकाता :- पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से 28 नवंबर तक 27 लाख 71 हजार वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं। चुनाव आयोग (Election Commission) के सूत्रों से मिली इस जानकारी के अनुसार, SIR प्रक्रिया के 25 दिन पूरे हो चुके हैं, जबकि एन्यूमरेशन फॉर्म भरने और जमा करने की अवधि में अभी एक सप्ताह शेष है। राज्य में कुल 7,66,37,529 मतदाता हैं। हटाए गए नामों में से 15.53 लाख वोटरों की मृत्यु हो चुकी है, 2.61 लाख का कोई अता-पता नहीं है, 2.88 लाख वोटरों ने अपना नाम ट्रांसफर करवा लिया है, और 58,164 नामों में डबल एंट्री (दोहराव) पाई गई थी।SIR प्रक्रिया के तहत 7 करोड़ 65 हजार एन्यूमरेशन फॉर्म वोटरों को दिए गए थे, जिनमें से 6 करोड़ 70 लाख वोटरों के फॉर्म अपलोड कर उनका डिजिटाइजेशन किया जा चुका है।

वोटरों के नाम सूची से हटने की प्रक्रिया को लेकर राज्य में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) महानगर से लेकर ब्लॉक स्तर तक सक्रिय हो गई है। पार्टी प्रत्येक विधानसभा केंद्र पर अपने नेताओं को भेज रही है, जिनका मुख्य कार्य तृणमूल कांग्रेस के बनाए गए ऐप में वोटरों के नामों को अपलोड करना है, ताकि कोई भी वैध वोटर सूची से बाहर न हो जाए।

वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार जबरन अवैध वोटरों का नाम तालिका में डाल रही है और इसके लिए बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) एवं चुनाव अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि 1 करोड़ 20 लाख से अधिक अवैध वोटरों के नाम सूची से हटाए जाएंगे।

इस बीच, चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पश्चिम बंगाल के मामले में सख्ती दिखाते हुए दिख रहे हैं। SIR प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ी पर निगरानी रखने के लिए पश्चिम बंगाल के 13 जिलों में 13 ऑब्जर्वर भेजे गए हैं। इसी क्रम में, पश्चिम बर्दवान जिले में इलेक्शन कमीशन के स्पेशल ऑब्जर्वर के रूप में स्मिता पाण्डेय को भेजा गया है। SIR प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव आयोग की यह विशेष निगरानी जारी रहेगी।

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