आर्थिक पारदर्शिता एवं गौ सेवा की मिसाल है रानीगंज गौशाला की पवित्र भूमि


रानीगंज :- एक वक्त था जब रानीगंज गौशाला धीरे-धीरे खंडहर की अवस्था में पहुंच गयी थी, न गायों की सेवा समुचित रुप में हो पाती थी और न ही गौशाला का ढांचागत विकास ही हो पा रहा था। किन्तु वर्तमान में  कोलकाता पिंजरापोल सोसाइटी अर्थात रानीगंज गौशाला की आर्थिक पारदर्शिता, ढांचागत विकास एवं निस्वार्थ गौ भक्त सेवा समूचे रानीगंज, आसनसोल, दुर्गापुर शिल्पांचल में एक मिसाल के रुप में सामने आयी है। गौशाला की पवित्र धरती एवं गौ भक्तों की कार्यशैली मिसाल के रुप में सामने आयी है। गौशाला में अपनी सेवा प्रदान करने वालों का मनोबल इस कदर समर्पित है कि एक समोसा भी दलिया ग्रुप के सदस्य या वर्तमान कार्यकारिणी कमेटी के सदस्य अपने पैसे से ही खाते है। चुनाव सामने आते ही निराधार आरोप-प्रत्यारोप या तर्कसंगत बाते सामने आती ही है। परन्तु सच की एक खासियत होती है यह न तो बढ़ता है न तो कमता है। जो हकीकत है यहीं सामने आता है। आगामी 22 जनवरी गुरुवार को रानीगंज गौशाला कार्यकारिणी समिति का चुनाव है और इस चुनाव में दलिया ग्रुप के कर्मठ गौभक्त अपनी भागीदारी बतौर ग्रुप उम्मीदवार के रुप में निभा रहे है। वहीं, 4 उम्मीदवार नीजी तौर पर चुनावी मैदान में सामने आए है। रानीगंज गौशाला में चुनाव की प्रक्रिया संस्था की एक गणतांत्रिक प्रक्रिया है। अगर सामने अधिक प्रतिद्वंदी हो तो चुनाव कराना आवश्यक होता है। परन्तु वर्तमान कमेटी के लोगो के कार्यशैली से एवं निस्वार्थ गौ भक्ति से रानीगंज गौशाला के लगभग 800 से अधिक सदस्य संतुष्ट है। रानीगंज गौशाला में कुल गायों की संख्या 375 है। इनमें वर्तमान दुधारु गाय यानी दुध देने वाली गाय केवल 71 ही है। इन्हीं 71 गायों के दुध को आसानी से गौशाला के सदस्यों के घरों तक पहुंचता है। इस वाणिज्यिक बाजार में जहां हर चीज में मिलावट का दौर चल रहा है, ऐसे में गौशाला का दुध जिनकों भी उपलब्ध होता है यह निःसंदेह अमृत के रुप में गाय का दुध उपलब्ध होता है। वहीं, गायों की सेवा भी बढ़-चढ़कर गौशाला की दलिया ग्रुप करती है। केवल दुधारू गाय नहीं बल्कि ठाट यानी दुध नहीं देने वाले गायों की भी सेवा समांतर रुप में की जाती है। वर्तमान में रानीगंज गौशाला में ठांट गाय यानी सेवा की गायों की संख्या 200 है एवं नंदी गाय की संख्या 10 है। इसके अलावा दूध पीने वाली बाछी की संख्या 30 और दुध पीने वाला बाछा की संख्या 3 है। इसके अलावा बड़ी बाछी की संख्या 35 है। रानीगंज गौशाला की पवित्र भूमि गौ भक्ती की एक मिशाल है। ऐसा इसलिए कहा जाता है कि चाहे दुध देने वाली गाय हो या ठांट गाय। नंदी हो या बाछा, सभी की सेवा गौ माता के रुप में तन-मन-धन से की जाती है। 

रानीगंज गौशाला में पिछले 6 वर्षो से बतौर कोषाध्यक्ष के रुप में अपनी सेवा देने वाले श्रवण कानोड़िया एवं कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों का कहना है कि हम गौ भक्त अपनी सेवा समान रुप में गौ माता की करती है। फिर चाहे वो ठांट गाय हो या दुध देने वाले। अगर भूल से भी पैर में दुध का छिटा भी पड़ जाता है तो हम नमन कर उसे सिर पर लगाते है। ऐसे का दुध का व्यवसायीकरण हम सोच नहीं सकते बल्कि सेवा के रुप में खांटी दुध सदस्यों के घरों तक पहुंचाते है। चुनाव एक गणतांत्रिक पद्धति है। ऐसे में सभी को अधिकार है अपनी भागीदारी निभाने की। सभी को अधिकार है वो उम्मीदवार बने। अब किसे गौ सेवा का मौका दिया जाता है तो यह तो गौशाला के सदस्यों पर निर्भर है। रहीं बात खर्च की तो रानीगंज गौशाला में चुनाव के खर्च का अतिरिक्त बोझ न आए, इसलिए चुनाव के सारे खर्चे उम्मीदवार अपने पॉकेट व्यय कर रहे है। जो भी खर्च होगा चुनाव प्रक्रिया के दौरान वे सारे खर्च उम्मीदवार अपनो में बांटकर व्यय करेंगे। हमारा उद्देश्य गणतांत्रिक प्रक्रिया को बनाए रखने की है न कि रानीगंज गौशाला के धन को फिजुल खर्ची के रुप में व्यय करने की। रानीगंज गौशाला अपने आय और व्यय का पूरा विवरण सभी सदस्यों तक पहुंचाता है। इतना ही नहीं दान के एक-एक पैसे का विवरण दाता समेत सदस्यों तक पहुंचाया जाता है। और रहीं बात बैलेंस सीट की तो रानीगंज गौशाला की ऑफिस में खुले रुप में रखा जाता है ताकि कोई भी सदस्य किसी भी वक्त बिना किसी रोक टोक के हिसाब देख सकता है। हमारी पारदर्शिता किसी भी संस्था के तूलना में पवित्र और बेहतर है।

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