West Bengal में 8 की जगह 6 चरणों में विधानसभा चुनाव का प्रस्ताव, 1100 कंपनी से ज्यादा सेंट्रल फोर्स की तैनाती ?

कोलकाता :- निर्वाचन आयोग के गलियारों में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के मुख्यालय में सोमवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल में मतदान के चरणों को आठ से घटाकर छह करने का एक बड़ा प्रस्ताव सामने आया है। मुख्य चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल सहित पांच राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने राज्य में मतदान प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए चरणों की संख्या कम करने का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि चरणों की कटौती से कानून-व्यवस्था को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सकेगा और संवेदनशील व अति-संवेदनशील बूथों पर सुरक्षा बलों की तैनाती अधिक प्रभावी तरीके से हो पाएगी।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी इस बार आयोग बेहद गंभीर नजर आ रहा है। खबर है कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए साल 2024 के लोकसभा चुनाव की तुलना में अधिक केंद्रीय सुरक्षा बलों की मांग की गई है। ज्ञात हो कि पिछले लोकसभा चुनाव में राज्य में कुल 1094 कंपनी केंद्रीय बल तैनात किए गए थे, लेकिन इस बार यह संख्या और भी ज्यादा हो सकती है। बैठक के दौरान राज्य में चल रही मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया और उससे जुड़े राजनीतिक विवादों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मनोज अग्रवाल से राज्य की चुनावी तैयारियों पर एक समग्र रिपोर्ट भी ली है। हालांकि चरणों को कम करने का प्रस्ताव चर्चा में है, लेकिन अंतिम निर्णय लेने से पहले आयोग 2021 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों के अनुभवों को आधार बनाएगा। कानून-व्यवस्था की वर्तमान स्थिति और जिलावार संवेदनशीलता का आकलन करने के बाद ही चरणों की अंतिम संख्या निर्धारित की जाएगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ भी बैठक कर सकते हैं। वर्तमान में आयोग राज्य के संवेदनशील बूथों की सूची तैयार करने में जुटा है, जिसके आधार पर ही सुरक्षा और चुनाव की पूरी रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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