गौरतलब है कि अनूप माझी की यह पेशी कानूनी रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मिली गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा (Interim Protection) को वापस ले लिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को बड़ी राहत देते हुए लाला को 14 दिनों की हिरासत में लेकर पूछताछ करने की अनुमति भी प्रदान कर दी है। शीर्ष अदालत का यह कड़ा रुख लगभग एक सप्ताह पहले सामने आया था, जिसके बाद से ही जाँच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है।
अदालत में पेशी के दौरान कानूनी विशेषज्ञों और जांच अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि सीबीआई कोर्ट अब आगे की प्रक्रिया के लिए क्या दिशा-निर्देश जारी करती है। कोयला तस्करी के इस बड़े जाल की परतों को खोलने के लिए लाला से होने वाली पूछताछ को निर्णायक माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट के इस फैसले के बाद जाँच एजेंसियां अनूप माझी को हिरासत में लेकर किन नए तथ्यों का खुलासा करती हैं, जिससे इस पूरे सिंडिकेट की कड़ियाँ जोड़ी जा सकें।



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