जांच में सिंडिकेट के काम करने के चौंकाने वाले तरीके सामने आए हैं। अवैध रूप से निकाले गए कोयले के परिवहन के लिए "लाला पैड" नामक फर्जी चालान का उपयोग किया जाता था, जो गैर-मौजूद कंपनियों के नाम पर जारी होते थे। तस्करी को सुरक्षित बनाने के लिए सिंडिकेट 10 या 20 रुपये के नोट को 'पास' के तौर पर इस्तेमाल करता था। ट्रक चालक नोट को गाड़ी की नंबर प्लेट के साथ रखकर फोटो खींचता था और उसे सिंडिकेट के ऑपरेटर को भेज देता था। इसके बाद वह फोटो व्हाट्सएप के जरिए रास्ते में पड़ने वाले संबंधित पुलिस अधिकारियों और अन्य सरकारी अधिकारियों को भेजी जाती थी ताकि ट्रक को बिना किसी बाधा के जाने दिया जा सके।
ईडी की जांच में लगभग 2,742 करोड़ रुपये के 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' (अपराध की कमाई) का पता चला है। सिंडिकेट इस काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए भूमिगत हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल करता था, जहां करेंसी नोट के सीरियल नंबर ही लेन-देन के 'कोड' के रूप में काम करते थे। इस नेटवर्क के जरिए बिना किसी बैंकिंग रिकॉर्ड के भारी मात्रा में नकदी इधर-उधर की जाती थी। ईडी ने पाया कि स्टील और आयरन क्षेत्र की कुछ कंपनियों, जैसे शाकंभरी इस्पात एंड पावर लिमिटेड और गगन फेरोटेक लिमिटेड, ने नकद भुगतान कर अवैध कोयला खरीदा और अपराध की इस कमाई को वैध दिखाने की कोशिश की। वर्तमान में कुर्क की गई संपत्तियों में इन्हीं कंपनियों के नाम पर अचल संपत्तियां, सावधि जमा (FD) और म्यूचुअल फंड निवेश शामिल हैं। एजेंसी अब इस जटिल वित्तीय जाल की हर परत को खंगाल रही है ताकि अंतिम लाभार्थियों तक पहुँचा जा सके।




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