रानीगंज :- रानीगंज शहर और इसके आसपास के इलाकों में ईसीएल द्वारा ओपन कास्ट प्रोजेक्ट (ओसीपी) के माध्यम से कोयला खनन के बढ़ते प्रयासों और कुछ इलाकों में नए भवन निर्माण की अनुमति न मिलने का मुद्दा अब गरमाने लगा है। इस गंभीर समस्या को लेकर 'रानीगंज बचाओ मंच' ने रविवार को जागरूकता अभियान चलाया। मंच के सदस्यों ने राम बगान सहित विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर स्थानीय निवासियों को शहर पर मंडरा रहे संभावित खतरों के प्रति जागरूक किया और उन्हें इस आंदोलन में शामिल होने के लिए आह्वान किया। इस दौरान लोगों के बीच पर्चे भी बांटे गए ताकि वे वास्तविक स्थिति को समझ सकें।
रानीगंज बचाओ मंच के संयुक्त संयोजक गौतम घटक ने स्पष्ट किया कि शहर के अस्तित्व की रक्षा के लिए सभी एनजीओ को मिलाकर इस मंच का गठन किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि महावीर कोलियरी, एगरा, रोनाई, नारायणकुड़ी और बांसड़ा जैसे इलाकों में चारों तरफ से ओसीपी खोलकर रानीगंज की घेराबंदी करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चिंता जताई कि यदि ओसीपी चालू होती है, तो पूरे क्षेत्र में पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा और प्रदूषण का स्तर जानलेवा सीमा तक बढ़ जाएगा। मंच का मानना है कि ईसीएल रानीगंज शहर को खाली कराने की साजिश रच रहा है। उन्होंने मांग की कि भूगर्भ में मौजूद कोयले को निकालने के लिए आधुनिक अंडरग्राउंड माइनिंग तकनीक का सहारा लिया जाए, न कि विनाशकारी ओसीपी का।
मंच के एक अन्य संयुक्त संयोजक डॉ. एस.के. बासु ने कहा कि ईसीएल की इन नीतियों के कारण न केवल पर्यावरण नष्ट होगा, बल्कि स्थानीय लोगों का विस्थापन भी शुरू हो जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि रानीगंज की जनता को अपने भविष्य के लिए जागरूक होना होगा। इस अभियान में राजेंद्र प्रसाद खेतान, गोपाल आचार्य सहित मंच के कई प्रमुख सदस्य सक्रिय रूप से शामिल रहे। रानीगंज बचाओ मंच ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन और ईसीएल ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और भी तेज रूप दिया जाएगा।

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