बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि केंद्रीय बलों के राज्य में पहुंचते ही उन्हें बिना समय गंवाए सीधे उनके निर्धारित कार्यक्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। आयोग का मुख्य उद्देश्य समय की बर्बादी को रोकना और सुरक्षा बलों का अधिकतम उपयोग करना है। सीआरपीएफ और अन्य बलों की गतिविधियों पर विशेष पर्यवेक्षक नजर रखेंगे, ताकि तैनाती में पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही, चुनाव प्रक्रिया के दौरान डेटा और सूचना संबंधी कार्यों में जुटे अधिकारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य प्रशासन को सौंपी गई है।
निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनाव की तारीखों के आधिकारिक ऐलान से पहले ही राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती का निर्णय लिया है। गृह मंत्रालय द्वारा राज्य प्रशासन को भेजी गई सूचना के अनुसार, कुल 480 कंपनी केंद्रीय बल दो चरणों में पश्चिम बंगाल पहुंचेंगे। पहले चरण में 1 मार्च तक 240 कंपनियां राज्य में दस्तक देंगी, जिनमें सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और सीआईएफएफ के जवान शामिल होंगे। इसके बाद 10 मार्च तक दूसरे चरण में शेष 240 कंपनियां तैनात की जाएंगी। इन बलों की अग्रिम तैनाती का उद्देश्य संवेदनशील इलाकों में रूट मार्च करना और मतदाताओं के भीतर विश्वास पैदा करना है ताकि वे बिना किसी भय के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।



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