आसनसोल :- पश्चिम बंगाल की राजनीति में विशेष महत्व रखने वाले बाराबनी विधानसभा क्षेत्र के लिए भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार अपने पत्ते खोल दिए हैं। काफी लंबे इंतजार के बाद भाजपा ने एक बार फिर अपने युवा चेहरे अरिजीत राय पर भरोसा जताते हुए उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है। भाजपा के इस फैसले के साथ ही अब बाराबनी का चुनावी रण पूरी तरह सज चुका है, जहां अरिजीत राय का सीधा मुकाबला क्षेत्र के दिग्गज नेता और तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी विधान उपाध्याय से होगा। विधान उपाध्याय न केवल वर्तमान में आसनसोल नगर निगम के मेयर हैं, बल्कि वे बाराबनी से लगातार तीन बार चुनाव जीतकर जीत की हैट्रिक भी लगा चुके हैं।
बाराबनी विधानसभा के पिछले चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो यहाँ तृणमूल कांग्रेस का दबदबा स्पष्ट दिखाई देता है। साल 2011 के विधानसभा चुनाव में विधान उपाध्याय ने पहली बार जीत दर्ज कर इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की थी। इसके बाद 2016 के चुनावों में भी उन्होंने अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा। 2021 के विधानसभा चुनाव में, जब पूरे बंगाल में राजनीतिक पारा चरम पर था, विधान उपाध्याय ने भाजपा के अरिजीत राय को शिकस्त देते हुए लगातार तीसरी बार जीत का परचम लहराया और जीत की हैट्रिक पूरी की। भाजपा के उम्मीदवार अरिजीत राय की बात करें तो वे पार्टी के युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष रह चुके हैं और संगठन में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। हालांकि, चुनावी मैदान में उनका अनुभव अब तक हार का ही रहा है। अरिजीत राय इससे पहले भी बाराबनी से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें विधान उपाध्याय के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा था।
इस बार का चुनाव अरिजीत राय के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि उन्हें एक ऐसे प्रतिद्वंद्वी को हराना है जो पिछले 15 वर्षों से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहा है। भाजपा ने एकबार फिर अरिजीत राय को मौका देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह उनके निरंतर संघर्ष और युवा ऊर्जा पर दांव खेल रही है।
दूसरी ओर, मेयर विधान उपाध्याय अपनी विकास योजनाओं और क्षेत्र में अपनी मजबूत जमीनी पैठ के भरोसे चौथी बार जीत दर्ज करने के इरादे से मैदान में हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अरिजीत राय पिछली हार का बदला लेकर बाराबनी में कमल खिलाने में कामयाब होते हैं या फिर विधान उपाध्याय अपनी बादशाहत कायम रखते हुए इस सीट पर टीएमसी का कब्जा बरकरार रखते हैं। फिलहाल, उम्मीदवारों की घोषणा के बाद बाराबनी की गलियों में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं और दोनों ही खेमे अपनी-अपनी जीत की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।

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