West Bengal में सिर्फ 2 चरणों में विधानसभा चुनाव, 23 अप्रैल को पहले और 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग, 4 मई को काउंटिंग

कोलकाता :-  केंद्रीय चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। रविवार की शाम नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल और दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी। पहले चरण में 152 और दूसरे चरण में 142 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे जबकि मतगणना 4 मई को होगी। यह पहली बार है जब पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य में सिर्फ दो चरणों में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में वोटरों की संख्या लगभग 6 करोड़ 44 लाख है और 294 विधानसभा सीटें हैं। 7 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

भारत निर्वाचन आयोग ने रविवार शाम एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पश्चिम बंगाल सहित देश के पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा जारी सूचना के अनुसार, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में चुनावी प्रक्रिया अप्रैल के महीने में संपन्न होगी, जबकि सभी राज्यों के चुनावी नतीजे एक साथ 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इस घोषणा के साथ ही संबंधित राज्यों में तत्काल प्रभाव से आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है।


​पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल चुनावी जंग इस बार दो चरणों में सिमटी नजर आएगी। राज्य में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होगा, जबकि दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को निर्धारित की गई है। वहीं दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण राज्यों तमिलनाडु, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में एक ही चरण में मतदान प्रक्रिया पूरी की जाएगी। तमिलनाडु में मतदाता 23 अप्रैल को अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जबकि केरल और पुडुचेरी में मतदान के लिए 9 अप्रैल की तारीख तय की गई है।

​पूर्वोत्तर राज्य असम में भी चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है, जहाँ 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सभी पांच राज्यों में मतगणना एक ही दिन यानी 4 मई को होगी, जिससे यह साफ हो जाएगा कि इन राज्यों की सत्ता की चाबी जनता किसके हाथों में सौंपती है। चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है और उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की प्रक्रिया भी तेज हो गई है।


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