दामोदर नदी में मशीनों से बालू खनन पर मंत्री अग्निमित्रा पाल का बड़ा बयान, नियमों के उल्लंघन पर होगी कारवाई

दुर्गापुर :- दुर्गापुर के मायाबाजार वारिया के काली मंदिर के पास दामोदर नदी से व्यापक पैमाने पर हो रहे बालू खनन को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। पिछले कुछ दिनों से इस इलाके में नदी से बालू निकालने और उसे ट्रकों में लादने का काम बड़े पैमाने पर चल रहा है, जिसके तहत रोजाना 100 से अधिक ट्रक बालू लेकर रवाना हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लग रहे हैं कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के नियमों का उल्लंघन करते हुए पोकलेन और जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल कर नदी का सीना चीरा जा रहा है। इतना ही नहीं, भारी वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए दामोदर नदी के बीचों-बीच एक अस्थायी सड़क तक का निर्माण कर लिया गया है।

इन तमाम आरोपों पर अब राज्य की शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पाल का बड़ा बयान सामने आया है। दुर्गापुर में एक कार्यक्रम के दौरान जब उनसे इस विषय पर सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि यदि राज्य सरकार की अनुमति से वैध तरीके से और चालान के साथ बालू घाट चल रहे हैं, तो उसमें कोई कानूनी अड़चन नहीं है। लेकिन यदि कहीं भी तय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो शिकायत मिलते ही प्रशासन सख्त कदम उठाएगा। नदी के बीचों-बीच पोकलेन या जेसीबी मशीन लगाकर बालू खनन करने के आरोपों पर मंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह पूरी तरह असंभव है और अगर ऐसी कोई शिकायत मिलती है, तो इसे तुरंत बंद कराया जाएगा और डीएम को इसकी जानकारी दी जाएगी।

मंत्री अग्निमित्रा पाल ने एनजीटी के नियमों का हवाला देते हुए साफ किया कि नदियों से मशीनों के जरिए बालू उठाने की अनुमति नहीं है, वहां केवल मैन्युअल यानी मजदूरों द्वारा ही बालू का उठाव किया जा सकता है। पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 15 साल तृणमूल कांग्रेस और उससे पहले 34 साल वाममोर्चा की सरकार में सूबे की नदियों को जमकर बर्बाद किया गया, लेकिन अब ऐसा बिल्कुल नहीं चलेगा। नदी के बीच रास्ता बनाने के तकनीकी पहलू पर उन्होंने असमर्थता जताई। 

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