आगामी सोमवार को विधानसभा में कुल पांच विधेयक पेश किए जाने की सूची है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से 'समान नागरिक संहिता 2026' विधेयक को सबसे अहम माना जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बसु की अध्यक्षता में हुई कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में इस बिल को पेश करने का अंतिम निर्णय लिया गया। दिलचस्प बात यह है कि इस बैठक से पहले दोपहर में हुई चर्चा के दौरान इस विधेयक को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई थी, लेकिन शाम को मुख्यमंत्री के विधानसभा पहुंचने के बाद राजनीतिक समीकरण बदले और इस सत्र में ही बिल लाने पर सहमति बनी।
विधानसभा के टेबल ऑफिस के मुताबिक, सोमवार के सत्र के दूसरे हिस्से में इस विधेयक पर चर्चा के लिए एक घंटे का समय तय किया गया है। इस चर्चा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी सहित सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता हिस्सा लेंगे, जिसके चलते सदन में तीखी बहस होने के पूरे आसार हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनावों के बाद राज्य सरकार का यह अब तक का सबसे बड़ा नीतिगत फैसला है। इस विधेयक के जरिए विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने की योजना है, जिस पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

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