दुर्गापुर :- पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से लगभग 60 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के गंभीर आरोप लगाते हुए वामपंथी संगठनों ने भारी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार को दुर्गापुर में अनुमंडल शासक (एसडीओ) कार्यालय के बाहर वामपंथी कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और कार्यालय का घेराव कर धरने पर बैठ गए। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व प्रमुख वामपंथी नेता मीनाक्षी मुखर्जी, माकपा नेता सिद्धार्थ बसु और गौरांग चटर्जी सहित जिले के कई वरिष्ठ नेताओं ने किया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में सुधार के नाम पर बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं को 'विचाराधीन' श्रेणी में डाल दिया गया है, जबकि कई मामलों में जानबूझकर पात्र लोगों के नाम सूची से गायब कर दिए गए हैं। वामपंथी नेताओं ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस कदम से आम जनता के मताधिकार पर संकट खड़ा हो गया है और वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने को लेकर अनिश्चितता की स्थिति में हैं। नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में और भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
विरोध प्रदर्शन के दौरान वामपंथी नेता ओइशी घोष ने कहा कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाना एक सोची-समझी साजिश है और लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने की इस कोशिश को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक सभी वैध मतदाताओं के नाम वापस सूची में शामिल नहीं हो जाते, उनका संघर्ष जारी रहेगा। इस घेराव के कारण काफी समय तक दुर्गापुर अनुमंडल कार्यालय परिसर में तनाव का माहौल बना रहा, जिसे नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी। हालांकि, घंटों चले इस प्रदर्शन के बाद कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हुआ।

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