Asansol में बीपीएल आवास आवंटन घोटाले में AMC कर्मी सहित 5 गिरफ्तार, कोर्ट में पेशी

आसनसोल :- आसनसोल नगर निगम के डामरा क्षेत्र में गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए बनाए गए सरकारी आवासों के आवंटन में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। गरीबों के हक के मकानों को कथित तौर पर मोटी रकम लेकर रसूखदारों और अपात्र लोगों को बेचने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मामले में तत्परता दिखाते हुए आसनसोल दक्षिण थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी आसनसोल नगर निगम कर्मी सहित 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार को सभी आरोपियों को आसनसोल जिला अदालत में पेश किया गया।


इस पूरे फर्जीवाड़े को लेकर शुक्रवार को ही भाजपा नेताओं ने एक प्रेस वार्ता कर नगर निगम प्रशासन और सत्ता पक्ष पर तीखा हमला बोला था।भाजपा का आरोप है कि नगर निगम के कर्मचारी प्रमोद यादव ने नियमों को ताक पर रखकर, भारी भरकम रिश्वत के एवज में असली और जरूरतमंद लाभार्थियों की सूची से नाम गायब कर दिए। उनकी जगह ऐसे लोगों को बीपीएल आवास आवंटित कर दिए गए जो इस योजना की पात्रता ही नहीं रखते थे। इस मामले के उजागर होने के बाद से ही डामरा और आस-पास के इलाकों के गरीब परिवारों में भारी आक्रोश देखा जा रहा था।


मामले की गंभीरता को देखते हुए आसनसोल दक्षिण थाने की पुलिस ने त्वरित जांच शुरू की और इस रैकेट से जुड़े पांच कथित आरोपियों को दबोच लिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह घोटाला केवल कुछ मकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा था। आवास आवंटन से जुड़े तमाम सरकारी दस्तावेजों, फाइलों और बैंक लेन-देन के साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसमें नगर निगम के किन अन्य बड़े अधिकारियों या रसूखदारों का वरदहस्त था।

बीपीएल आवास योजना में हुए इस कथित भ्रष्टाचार ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। जहाँ एक तरफ इस मामले को लेकर शहर की राजनीति गरमा गई है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस और जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि गरीबों के हक पर डाका डालने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और पात्र परिवारों को उनका हक दिलाया जाएगा।

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