कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ता में 15 वर्ष पश्चात परिवर्तन आया। इस परिवर्तन ने तृणमूल कांग्रेस को उखाड़कर फेंक दिया और बीजेपी को सत्ता में भारी जीत के साथ बैठाया। सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य व्यापी पुलिस की बड़ी कार्यवायी सामने आयी। फिर चाहे 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक हिंसा की हो या 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक हिंसा की हो। इस सभी मामले में पुलिस सख्ती से कार्यवायी कर रही है। राजनीति हिंसा, धमकी, तोलाबाजी, फिरौती, दुर्निति या इलाके में मस्तानी कर भय का माहौल कायम करने जैसी घटनाओं पर पुलिस शिकायत के आधार पर कड़ी कार्यवायी कर रही है। कोलकाता महानगर समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में इन मामलों के आरोपी तृणमूल कांग्रेस नेता हो या इलाके का मस्तान, सभी के विरुद्ध पुलिस कड़ी कार्यवायी कर रही है। इनकी गिरफ्तारी भी की जा रही है। परन्तु गिरफ्तारी के दौरान इनकों कमर में रस्सी बांधकर थाने ले आना या थाने से कोर्ट तक ले जाना जैसी घटनाओं पर आपत्ति जतायी गयी है। इतना ही नहीं इलाके के मस्तान के रुप में चिन्हित अभियुक्तों को पुलिस न केवल गिरफ्तार कर रही है बल्कि इनके खौफ को इलाके से खत्म करने के लिए कमर में रस्सी बांधकर हाफ पैंट में घुमा रही है। इन सब दृश्यों को सामने रखकर कई आपत्तियां पुलिस के विरुद्ध उठ खड़ी हुयी है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट में जनस्वार्थ मामला अर्थात PIL दर्ज किया गया है। जिसकी सुनवाई कोलकाता हाईकोर्ट के डिविजन बेंच में की गयी। डिवीजन बेंच के न्यायाधीश जय सेनगुप्ता व स्मिता दास दे ने राज्य सरकार से 3 सप्ताह में इस मामले में रिपोर्ट मांगी है कि आखिर क्यों अभियुक्तों के सम्मानहानी की जा रही है। न्यायाधीशों ने यह भी तर्क दिया कि आप किसी अभियुक्तों के विरुद्ध कानूनी कार्यवायी कर सकते है, उनको गिरफ्तार कर सकते है, कसूरवार पाए जाने पर उन्हें फांसी की भी सजा दी जा सकती है, परन्तु गिरफ्तारी के नाम पर कमर में रस्सी बांधकर बाजार में घुमाकर सम्मानहानी किस लिए ? यह पूरी तरह से अनैतिक है। इस पर राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 3 सप्ताह का समय दिया गया है।
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