कोलकाता :- पश्चिम बंगाल की राजनीति में '21 जुलाई' (शहीद दिवस) के आयोजन को लेकर चल रही रस्साकशी के बीच एक बड़ा मोड़ आ गया है। इस बार तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंटी नजर आ रही है—एक ममता बनर्जी का 'कालीघाट गुट' और दूसरा ऋतब्रत बनर्जी का गुट। काफी विवाद के बाद आखिरकार विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाली 'तृणमूल' को मेयो रोड स्थित गांधी मूर्ति के पास 21 जुलाई के कार्यक्रम को आयोजित करने की अनुमति मिल गई है, जबकि 'कालीघाट तृणमूल' की 21 जुलाई के कार्यक्रम पर अभी संशय बरकरार है।
विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और विधायकों, जिनमें फिरहाद हकीम, अरूप रॉय, जावेद खान, नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती और काजल शेख शामिल थे, ने कार्यक्रम स्थल का दौरा किया। इस दौरान सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि क्या 21 जुलाई को होने वाली सभा में पार्टी की सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को आमंत्रित किया जाएगा ? इस पर ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि वे सभी ममता बनर्जी को एक मार्गदर्शक और सलाहकार के रूप में देखना चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि वे इस कार्यक्रम में शामिल होंगी।
गौरतलब है कि 21 जुलाई का दिन तृणमूल कांग्रेस के लिए हमेशा से सबसे बड़ा राजनीतिक आयोजन रहा है। साल 1993 में तत्कालीन युवा कांग्रेस के महाकरण अभियान के दौरान पुलिस की गोलीबारी में 13 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी, जिनकी याद में हर साल धर्मतला में शहीद दिवस मनाया जाता रहा है। साल 2025 तक इस पर तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी का एकछत्र नियंत्रण था, लेकिन इस बार तृणमूल में बड़ी टूट के बाद विधायी दल की कमान ऋतब्रत के हाथों में आ गई है, जिन्होंने खुद को असली तृणमूल बताते हुए इस बार के 21 जुलाई के आयोजन की कमान संभाल ली है।



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