कोलकाता : वर्ष 2013 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत केन्द्र सरकार देश भर के 80 करोड़ लोगो को मुफ्त में अनाज उपलब्ध करा रही है। 13 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह प्रक्रिया जारी है। राज्यों को कोटा के अनुरुप उपभोक्ताओं को मुफ्त में राशन दिए जाने के लिए यह सुविधा उपलब्ध कराती थी। किन्तु अब केन्द्र सरकार इस विषय को लेकर भी गंभीर हो चुकी है। विभिन्न मापदंडों के आधार पर देश भर के करीब 6 करोड़ अयोग्य-अपात्रों की पहचान कर ली गयी है और जल्द ही मुफ्त में राशन पाने की यह सेवा इनके पास से वापस ले ली जाएगी। अगर हम बात करे पश्चिम बंगाल की तो पश्चिम बंगाल में 6 करोड़ लोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तहत मुफ्त में राशन पाते है। इसके लिए पश्चिम बंगाल सरकार और 2 करोड़ 80 लोगो को राज्य सरकार की सब्सिडी पर मुफ्त में राशन उपलब्ध कराती है और पश्चिम बंगाल सरकार की यह पहल अन्य किसी राज्यों में देखने को नहीं मिलती है। पश्चिम बंगाल सरकार केन्द्र सरकार के राशन आवंटन के अलावा स्वंय की Subsidy देकर अतिरिक्त लोगो को मुफ्त में राशन देती है। और इसका मापदंड भी कोई खास नहीं था। प्रति माह 10 हजार रुपये तक आय करने वाले लोगो को राज्य सरकार यह सुविधा उपलब्ध करा रही थी किन्तु केन्द्र की खाद्य मंत्रालय द्वारा इस पर कड़ा निर्देश जारी किया है। पहले चरण में 6 करोड़ लोगो को चिन्हित किया गया है जो किसी भी रुप में मुफ्त में राशन पाने की अधिकारी नहीं है। दूसरे चरण के तहत कई मापदंडों के आधार पर राशन कार्ड की मुफ्त सेवा रद्द करने की पहल की गयी है। इनमें केन्द्र सरकार कर्मचारी या पेंशनभोगी, कर्मशियल वाहन के मालिक, चार चक्का गाड़ी के मालिक, GST नंबर लेकर व्यापार करने वाले या फिर सलाना 6 लाख रुपये से अधिक आय करने वाले लोगो को मुफ्त में राशन सेवा नहीं दिए जाने की बात कही गयी है। डेटा देने के लिए केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को सूचित किया है। बताया जाता है कि पहले चरण के तहत पश्चिम बंगाल के लगभग साढ़े 17 लाख लोगो को अयोग्य के रुप में चिन्हित किया गया है। यानी यह लोग किसी भी मापदंड से मुफ्त में राशन लेने के अधिकारी नहीं है।
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