अंडाल (राम बाबू यादव) :- प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल में निवेश और क्रिप्टो करेंसी के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई शुरू की है। इस अभियान के तहत केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम ने गुरुवार को पश्चिम बर्धमान जिले के अंडाल थाना अंतर्गत सुभाषपल्ली इलाके में स्थित दिलीप मल्लिक और उनके बेटे दिगंत मल्लिक उर्फ राम मल्लिक के आवास पर छापेमारी की। दिगंत मल्लिक पर आरोप है कि उसने सोशल मीडिया के जरिए आकर्षक विज्ञापनों का जाल बिछाकर और कोलकाता के फेयरली प्लेस में कार्यालय खोलकर क्रिप्टो करेंसी में भारी मुनाफे का झांसा दिया और बाजार से करोड़ों रुपये जुटाए।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस प्रकार जुटाई गई भारी-भरकम राशि को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए विदेशों में ट्रांसफर कर दिया गया। इस घोटाले की शिकायत मिलने पर जांच एजेंसी 'डायरेक्टरेट ऑफ इकोनॉमिक ऑफेंसेस' (DEO) ने पहले दिगंत को गिरफ्तार किया था, जिसे बाद में जमानत मिल गई थी। हाल ही में उसके बैंक खातों में संदिग्ध और भारी वित्तीय लेन-देन का पता चलने के बाद ईडी ने यह कदम उठाया है, जहां अधिकारी डिजिटल दस्तावेजों और बैंक पासबुक की जांच कर रहे हैं।
इस धोखाधड़ी के तार कोलकाता और राज्य के अन्य हिस्सों से भी जुड़े हुए हैं। कोलकाता के फेयरली प्लेस स्थित 'ज़ाराडोबिट एंड ज़ाराडोबिट ई-शॉपर्स प्राइवेट लिमिटेड' नामक संस्था के खिलाफ करीब 22 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें निवेशकों को 25 महीनों में हर महीने 4 प्रतिशत मुनाफे का लालच दिया गया था।
इसी जांच के सिलसिले में ईडी की अन्य टीमों ने हावड़ा के बैंटरा में कंपनी के डायरेक्टर सौरभ चट्टोपाध्याय के आवास और नदिया के रानाघाट स्थित शुभ्रकান্তি नाग के घर पर भी छापेमारी की। शुभ्रकান্তি पर 'स्टॉक गुरुकुल' नामक फर्जी चिटफंड संस्था चलाकर शेयर बाजार के नाम पर ठगी करने का आरोप है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस पूरे नेटवर्क का संबंध दुबई के एक व्यवसायी से भी है, जिसके माध्यम से धोखाधड़ी का पैसा विदेश भेजा गया था। फिलहाल केंद्रीय बलों की कड़ी सुरक्षा के बीच सभी ठिकानों पर तलाशी और पूछताछ का दौर जारी है।





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