रानीगंज श्री श्याम मंदिर में दिखा भक्ति का अद्भूत दृश्य, बंदर भी हाथ जोड़कर करने लगे आराधना


 रानीगंज:  प्राचीन शहर रानीगंज में वर्ष 2024 की 22 फरवरी को श्री श्याम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की गयी थी। इस मंदिर में शीष के दानी श्री खाटू श्याम जी, रानीसती दादी जी एवं राजस्थान के चूरु जिले के सुजानगढ़ कस्बे में स्थित सालासर बालाजी हनुमान की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गयी थी। परन्तु महज दो साल के अंदर ही आस्था और विश्वास का प्रतिबिंब बन चुका है रानीगंज शहर का श्री श्याम मंदिर। भले ही सरकारी कागजों में रानीगंज शहर को कोयला खदानों का शहर कहा जाता है, भले ही रानीगंज शहर को थोक व्यापार मंडी का शहर कहा जाता है, परन्तु वर्तमान में लोगों के दिलों में एक और नाम जुड़ गया है रानीगंज धाम। लोग अब रानीगंज शहर को खाटू धाम का शहर कहने लगे है। इस मंदिर में दर्शन हेतु केवल पश्चिम बर्दवान जिले के ही नहीं बल्कि कोलकाता महानगर समेत उप-महानगरों के अलावा बंगाल, बिहार, झारखण्ड, ओड़िसा से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है। श्री श्याम मंदिर के प्रति लोगों की आस्था और बढ़ गयी जब बंदर रुपी एक श्रद्धालु मंदिर में आ पहुंचा और हाथ जोड़कर सलासर हनुमान जी की आराधना करने लगा। यह दृश्य देखकर श्याम मंदिर में मौजुद श्रद्धालु हैरान रह गए। यह वाक्य गुरुवार शाम की है। एक श्रद्धालु इस दृश्य को अपने मोबाइल में कैद कर लिया। यह अद्भुत और काल्पनिक दृश्य सोशल मीडिया में काफी तेजी से वायरल हो रहा है। मंदिर में प्रतिष्ठित सलासर हनुमान जी की मूर्ति के सामने बंदर चुपचाप आकर बैठ जाता है और हाथ जोड़कर प्रणाम करने लगता है। कुछ पल तक तो मौजुद श्रद्धालुओं को पता नहीं चलता कि इतनी शांति ढंग से एक बंदर आकर हनुमान जी की मूर्ति के सामने आकर बैठ जाता है और हाथ जोड़कर आराधना करने लगता है। इस दृश्य ने भक्तों की आस्था और बढ़ाई है। वैसे तो मंदिरों में बंदर का आना-जाना लगा रहता है। परन्तु जिस भक्ति और श्रद्धा से एक बंदर हाथ जोड़कर हनुमान जी की मूर्ति के समक्ष प्रार्थणा कर रहा, यह अकल्पनिक और अद्भूत है। इस बारे में श्री श्याम मंदिर के ट्रस्टी एवं श्री श्याम बाल मंडल चेरिटेबल ट्रस्ट के सदस्य सतीश खेमका ने कहा कि यह बंदर गुरुवार की सुबह मेरे पास से गुजरकर मंदिर की ओर प्रवेश किया। परन्तु मौजूद गार्ड ने उसे यहां से भगा दिया। उसके बाद यह बंदर नजर नहीं आया। परन्तु श्याम मंदिर का कपाट अपने निर्धारित समय पर पुनः गुरुवार की शाम खुला तो अचानक से यह बंदर पुनः मंदिर में प्रवेश कर गया। मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं को पता ही नहीं चला। इसे हनुमान जी का चमत्कार और भक्ति की मिसाल बताया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर बंदर के माध्यम से भक्ति और श्रद्धा का संदेश लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। क्योंकि भक्ति की कोई सीमा नहीं होती है। श्री श्याम मंदिर में नियमित रुप से कई श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है, चाहे वर्षा हो या चिलचिलाती धूप और फिर कड़ाके की ठंड, श्याम मंदिर के दर्शन को नहीं भूलते। ऐसी ही एक मिशाल है रानीगंज शहर के खाड़सूली बाजार के व्यवसायी 98 वर्षीय नथमल केडिया जी। 98 वर्षीय नथमल केडिया जी रोजाना वाॅकर के सहारे मंदिर की सीढ़िया चढ़कर श्री खाटू श्याम जी का दर्शन करते है और पुनः वाॅकर के ही सहारे 98 वर्षीय बुजुर्ग सीढ़ियों से उतरते है। रोजाना इनका श्री श्याम मंदिर पहुंचना इस बात को प्रमाणित करता है कि आस्था की कोई उम्र नहीं होती और न ही कोई कठिनाइयां आस्था को रोक पाती है। ऐसे कई दृश्य श्री श्याम मंदिर की आस्था और भक्ति के प्रति समर्पित है। 



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