स्वर्गीय रामावतार बाजोरिया जी के सेवा भावना से जुड़े पथ चिन्ह पर अग्रसर है तीन पुत्र, पुनः असहाय विधवाओं के लिए चालू हुयी महीने भर की राशन सामग्री

वक्त की हो धूप या तेज हो  आँधियाँ  , कुछ कदमों के निशाॅ कभी नहीं मिटते,

जिन्हें याद करके मुस्कुरा दे ये आँखें वो लोग दूर होकर भी दूर नहीं होते !
रानीगंज : रानीगंज शिल्पांचल का शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति या संस्था होगी, जो स्वर्गीय रामावतार बाजोरिया के निस्वार्थ सेवा भाव से परिचित न हो। इस शहर की हर एक संस्था किसी न किसी रुप में स्वर्गीय रामावतार बाजोरिया के सेवा भाव के कार्यो से उपकृत एवं प्रभावित हुयी है। एक लाइन में कहे तो मसीहा तो नहीं थे परन्तु मसीहा से कम भी नहीं थे। जो इनके दरवार में आया वो खाली हाथ न गया। फिर चाहे वो किसी जाति का हो या धर्म का, परोपकार करना ही इनकी भावना में छूपी धर्म थी। उन्हीं के पथ चिन्ह पर उनके पुत्र संजय बाजोरिया, प्रदीप बाजोरिया एवं पवन बाजोरिया चल रहे है। अपने स्वर्गीय पिता जी के द्वारा चलाए गए हर परोपकारी कार्यो को नियमित रुप से करते आ रहे है। फिर चाहे गरीबों के लिए मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी अस्पताल में निःशुल्क बेड उपलब्ध कराने की बात हो या दवाईयां उपलब्ध कराने की बात। कभी भी स्वर्गीय रामावतार बाजोरिया के इन तीनों पुत्रों के कदम पीछे नहीं हटते। स्वर्गीय रामावतार बाजोरिया का स्वर्गवास 23 मार्च 2020 को हुआ था और इन 6 वर्षो के उनकी अनुपस्थिति में सेवामूलक कार्य, जनहित मूलक कार्य, दिन-दुखियों के प्रति सहायता के कार्य कभी भी नहीं रुके। विधवाओं को प्रति महीने दिए जाने वाले राशन सामग्री कोरोना संक्रमित काल के वजह से रुक गए थे, जिसे पुनः आरंभ किया गया।
सोमवार को रानीगंज के कुमार बाजार स्थित स्वामी विवेकानंद सेवा केन्द्र में 50 विधवा एवं असहाय महिलाओं को राशन सामग्री भेंट की गयी। इस मौके पर आसनसोल रामकृष्ण मिशन के सचिव सोमात्मानंद जी महाराज, रानीगंज विवेकानंद केन्द्र के सचिव सुब्रतानंद जी महाराज, बीजेपी नेता तुषांर कांति बनर्जी, दिनेश सोनी, देवजीत खां के अलावा भारत विकास परिषद के अध्यक्ष प्रदीप बाजोरिया,सचिव दीपक जालान, कोषाध्यक्ष गोपाल खेड़िया, पवन बाजोरिया समेत अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। 

इनकी उपस्थिति में असहाय विधवाओं को राशन सामग्री भेंट की गयी। महीने भर का राशन पाकर इन असहाय विधवा महिलाओं के चेहरे खिल गए। महीने भर की राशन सामग्री में वो सभी चीज मौजुद थी जो भोजन-पानी से जुड़ी हुयी है। केवल इतना ही नहीं मौसम के अनुसार भारत विकास परिषद इन असहाय विधवा महिलाओं की मद्द के लिए कैंप लगाते रहता है। कभी छाता तो कभी कंबल तो कभी दवा, तो कभी त्यौहारों से जुड़ी मिठाईयां भेंट की जाती है। और ये सारे सेवामूलक कार्य स्वर्गीय रामावतार बाजोरिया जी के तीन पुत्र एकसाथ होकर उत्साह एवं समर्पण की भावना के साथ करते है। 
इसलिए यह लाइने स्वर्गीय रामावतार बाजोरिया जी के लिए भी सुंदर बैठती है .... 
                            वक्त की हो धूप या तेज हो आँधियाँ, कुछ क़दमों के निशाँ कभी नहीं मिटते,
                            जिन्हें याद करके मुस्कुरा दे ये आँखें वो लोग दूर होकर भी दूर नहीं होते ! 


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