आसनसोल :- पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रशासनिक गतिरोध और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद राज्य के एक और महत्वपूर्ण नगर निगम, आसानसोल नगर निगम बोर्ड को भंग कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, अब आसानसोल नगर निगम की कमान संभालने के लिए पुरप्रशासक (प्रशासक) की नियुक्ति की गई है। इस जिम्मेदारी के लिए वरिष्ठ अधिकारी अदिती चौधरी को चुना गया है, जिन्हें तत्काल प्रभाव से आसानसोल नगर निगम का मुख्य प्रशासक नियुक्त किया गया है।
आसानसोल नगर निगम में पिछले काफी समय से गतिरोध की स्थिति बनी हुई थी। निगम प्रशासन पर लंबे समय से बोर्ड की कोई भी बैठक न करने और संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) अवैध रूप से माफ करने जैसे कई गंभीर आरोप लग रहे थे। इन विभिन्न शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए राज्य के नगर विकास विभाग के सचिव ने नगर निगम को एक कारण बताओ (शो-कॉज़) नोटिस जारी किया था। हालांकि, नगर निगम प्रशासन की ओर से इस नोटिस का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, जिसके बाद राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए पूरे पुरबोर्ड को ही भंग करने का निर्णय लिया।
अदिती चौधरी इससे पहले आसानसोल नगर निगम में ही कमिश्नर के पद पर कार्यरत थीं। हालांकि, हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार ने उन्हें विशेष जिम्मेदारी सौंपकर दक्षिण 24 परगना जिले में भेजा था। चुनाव संपन्न होने और राजनीतिक समीकरणों के बदलने के बाद राज्य की कई नगर पालिकाओं और नगर निगमों में प्रशासनिक संकट गहरा गया है। पार्षदों के लगातार इस्तीफों ने इस स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है, जबकि कई मेयरों के सुर भी बदले-बदले नजर आ रहे हैं। इस राजनीतिक और प्रशासनिक खींचतान के बीच सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा संचालित कई नगर निकायों के भविष्य पर सवालिया निशान खड़े हो गए थे, और आसानसोल नगर निगम भी इसी संकट की सूची में शामिल था।
कुल 106 वार्डों वाले इस विशाल आसानसोल नगर निगम में विवाद तब और बढ़ गया जब हाल के दिनों में छह पार्षदों और दो बोरो चेयरमैनों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा, पार्षदों को मिलने वाला मानदेय और आवंटित पेट्रोल का कोटा बंद किए जाने के आरोप भी सामने आए। इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच आसानसोल के मेयर बिधान उपाध्याय को सरकार की तरफ से कारण बताओ नोटिस भेजा गया था। अपने जवाब में बिधान उपाध्याय ने सरकार द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया था और उल्टा नगर निगम की कमिश्नर पर ही काम में असहयोग करने का आरोप मढ़ दिया था।
नोटिस मिलने के बाद बिधान उपाध्याय आसानसोल छोड़कर अचानक कोलकाता पहुंच गए थे। हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास या कार्यालय (कालीघाट) जाने के बजाय पार्टी के भीतर ही ऋतब्रत बनर्जी के गुट से संपर्क साधा। इसके बाद वह अपने दो बेहद करीबी सहयोगियों के साथ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष से मुलाकात करने पहुंच गए। इस औचक मुलाकात के बाद से ही राज्य के राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार बेहद गर्म हो गया है और आसानसोल की राजनीति ने एक नया मोड़ ले लिया है।


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