रानीगंज :- रानीगंज शहर के व्यस्ततम तिलक रोड (वार्ड संख्या 92) स्थित केडिया परिवार का लगभग 100 से 150 वर्ष पुराना तीन मंजिला जर्जर मकान बृहस्पतिवार को अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया। घटना के वक्त सड़क पर आवाजाही कम होने के कारण एक बड़ा हादसा टल गया और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। मकान गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और भारी धूल का गुबार छा गया। शुरुआती तौर पर स्थानीय लोगों ने आशंका है कि यह इमारत पहले से जर्जर हालत में थी और पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश इसके गिरने की ताजा वजह बनी। सूत्रों के अनुसार, यह इमारत लंबे समय से अत्यंत जर्जर स्थिति में थी। आसनसोल नगर निगम (पूर्व में रानीगंज नगरपालिका) की ओर से इस जर्जर मकान को खतरनाक घोषित कर 'खतरे का लाल बोर्ड' भी लगाया गया था और मकान खाली कर इसे गिराने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे को लेकर भाइयों के बीच चल रहे विवाद के कारण यह मकान नहीं गिराया जा सका और खतरनाक स्थिति में पड़ा था।
घटना की सूचना मिलते ही रानीगंज थाना पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई और इमारत के शेष लटकते हुए खतरनाक हिस्सों को हटाने का कार्य शुरू किया गया। मलबा सड़क तक बिखर गया था, जिसे हटाने का काम शुरू किया गया। इस घटना के बाद से स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि रानीगंज में आज भी लगभग दर्जनों ऐसी पुरानी और जर्जर इमारतें मौजूद हैं, जो कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। लोगों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा केवल नोटिस देने और बोर्ड लगाने के अलावा कोई कठोर प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की जाती। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार किए बिना प्रशासन को इन जर्जर ढांचों पर सख्त कदम उठाने चाहिए।



0 Comments