पाताल से बाहर निकली टनल बोरिंग मशीन 'दिव्या', खिद्दरपुर से विक्टोरिया के बीच 2029 में दौड़ेगी मेट्रो

कोलकाता :- कोलकाता मेट्रो की पर्पल लाइन (जोका-एस्प्लेनेड) के निर्माण कार्य में मंगलवार को एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। खिद्दरपुर से विक्टोरिया मेमोरियल तक पाताल का सीना चीरते हुए टनल बोरिंग मशीन (TBM) 'दिव्या' कंक्रीट की मजबूत दीवार को भेदकर सफलतापूर्वक बाहर निकल आई। पिछले ही महीने इसकी जुड़वां मशीन 'दुर्गा' ने विक्टोरिया स्टेशन के नीचे अपनी खुदाई पूरी की थी। इन दोनों अत्याधुनिक मशीनों की शानदार सफलता के साथ ही वर्ष 2029 की दीपावली तक जोका से एस्प्लेनेड के पूरे रूट पर यात्री मेट्रो सेवा शुरू होने की राह पूरी तरह निष्कंटक हो गई है।


सेंट थॉमस स्कूल के पास से अपनी यात्रा शुरू करने वाली इन दोनों मशीनों ने महज 10 महीनों की कड़ी मशक्कत के भीतर खिद्दरपुर से विक्टोरिया तक 2.65 किलोमीटर लंबी जुड़वां सुरंगों का निर्माण पूरा किया है। यह संपूर्ण परियोजना इंजीनियरिंग का एक बेमिसाल नमूना रही, क्योंकि इस दौरान आदि गंगा नदी और ऐतिहासिक विक्टोरिया मेमोरियल के नीचे से रास्ता बनाना बेहद जोखिम भरा था। इसके अलावा मार्ग में स्थित टाटा सेंटर और एवरेस्ट हाउस जैसी ऐतिहासिक गगनचुंबी इमारतों की नींव को बिना कोई नुकसान पहुंचाए सुरक्षित खुदाई करना एक बड़ी चुनौती थी।

मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, अगले दो महीनों तक सुरंग निर्माण के कारण आसपास की जमीन और इमारतों की सुरक्षा की गहन जांच की जाएगी। इसके बाद 'दुर्गा' और 'दिव्या' विक्टोरिया से पार्क स्ट्रीट के बीच 914 मीटर लंबी सुरंग खोदने के अगले चरण में प्रवेश करेंगी। योजना के मुताबिक, इस साल दिसंबर तक 'दुर्गा' पार्क स्ट्रीट पहुंचेगी, जबकि मार्च 2027 तक 'दिव्या' भी वहां पहुंच जाएगी, जिसके बाद एस्प्लेनेड तक का अंतिम निर्माण 'कट एंड कवर' तकनीक से किया जाएगा।

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