कोलकाता :- पश्चिम बंगाल में पहली बार सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता, कटमनी और रंगदारी (तोलाबाजी) जैसे मामलों पर कड़ा रुख अपनाया है। राज्य भाजपा अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि रंगदारी या सिंडिकेट गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर नेताओं और कार्यकर्ताओं को सीधे निष्कासन का सामना करना पड़ सकता है। पार्टी नेतृत्व ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर जोर देते हुए यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्तर के नेता को बख्शा नहीं जाएगा।
विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से भाजपा की अनुशासन समिति बेहद सक्रिय है। अब तक अनुशासनहीनता, रंगदारी और नेतृत्व के आदेश न मानने जैसे विभिन्न आरोपों में 200 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी कर निलंबित किया जा चुका है। भाजपा सूत्रों के अनुसार, इन मामलों में से 20 से अधिक निलंबन सीधे तौर पर कटमनी और रंगदारी से जुड़े हैं।
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने कहा कि एक अनुशासित राजनीतिक दल में अनुशासन बनाए रखने के लिए कई बार कड़े कदम उठाने पड़ते हैं। लेकिन आप लोग जो खबर फैला रहे हैं कि कई नेताओं के खिलाफ गुटबाजी (गुटबाज़ी) के कारण यह कार्रवाई की गई है—यह सही नहीं है। हाँ, कुछ मामलों में हमने कारण बताओ नोटिस (शोकॉज़) जारी किया है। कुछ ही लोगों को अस्थायी रूप से निलंबित (सस्पेंड) किया गया है। उनके खिलाफ कुछ संगठनात्मक कमियों/अनियमितताओं के आरोप थे, जिस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण माँगा गया है।
राज्य सरकार के मंत्रियों ने भी इस दिशा में कड़े संकेत दिए हैं। ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष और नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा है कि सत्ता का लाभ उठाकर अवैध कमाई की सोच रखने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अग्निमित्रा पॉल ने साफ किया कि किसी को 'वाशिंग मशीन' में धोकर पार्टी में शामिल नहीं किया गया है।
पार्टी के मुख्य प्रवक्ता देबजीत सरकार ने भी दोहराया कि सरकार में आने के बाद पार्टी की जिम्मेदारी बढ़ गई है। हालांकि, कई मामलों में कारण बताओ नोटिस का जवाब मिलने और बिना शर्त माफी मांगने के बाद 100 से अधिक मामलों का निपटारा कर निलंबन वापस भी लिया गया है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य राज्यभर के कार्यकर्ताओं को यह स्पष्ट संदेश देना है कि पार्टी की छवि से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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