नई पीढ़ि को झूलन उत्सव की सिख और परंपरा को बचाने के लिए आगे आया श्री श्री सीताराम जी मंदिर

 रानीगंज:    एक वक्त था जब सावन महीने में रक्षाबंधन उत्सव के ठीक पूर्व झूलन उत्सव को लेकर चारो तरफ तैयारियां चलती थी, हर गली, मंदिर एवं सामाजिक प्रतिष्ठानों में झूलन उत्सव का नजारा दिखता था। परन्तु जैसे-जैसे वक्त बितता गया, झूलन उत्सव के आयोजनों की संख्या में भी भारी गिरावट आती रही। अब तो गिने-चुने जगहों पर ही झूलन उत्सव किया जाता है। वैसे झूलन उत्सव को हिंडोला उत्सव भी कहा जाता है। मूल रुप से भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के दिव्य प्रेम और श्रीकृष्ण के बाल लीलाओं एवं वर्षा ऋतु को सामने रखकर झूलन उत्सव किया जाता है। क्योंकि सावन का महीना सुहावने मौसम से घिरा रहता है। नई पीढ़ि को झूलन उत्सव की सिख और इसकी परंपरा को बचाए रखने के लिए रानीगंज के श्री श्री सीताराम जी मंदिर की कार्यकारिणी कमेटी प्रत्येक वर्ष आकर्षक रुप में झूलन उत्सव का आयोजन करती है। हर वर्ष एक नए थीम को सामने लाकर झूलन उत्सव की प्रदर्शनी लगाती है। इस बार भी श्री श्री सीताराम जी मंदिर परिसर में भव्य झूलन उत्सव का आयोजन किया गया है। इस बार का थीम कौरव-पांडव के बीच महाभारत का दृश्य। साथ ही साथ बर्बरीक और श्रीकृष्ण की प्रसंग को भी झूलन उत्सव में दर्शाया गया है। इसके अलावा भी कई धार्मिक प्रसंगो को इस झूलन उत्सव का केन्द्र बिंदू बनाया गया है।

 श्री श्री सीताराम जी मंदिर कार्यकारिणी कमेटी के अध्यक्ष बिमल बाजोरिया, कोषाध्यक्ष ललित झुनझुनवाला, सदस्य सज्जन बाजोरिया, हरि सोमानी, बिजय छंछोरिया, अभिषेक बगाड़िया समेत अन्य सदस्यों ने झूलन उत्सव को सफल बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। इस बारे में अध्यक्ष बिमल बाजोरिया, ललित झुनझुनवाला और हरि सोमानी ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी झूलन उत्सव को बहुत ही महत्वता के साथ दर्शाया गया है। लाखों रुपये खर्च हुए है और स्थानीय कलाकारों ने झूलन को अंतिम रुप दिया है। हमारा उद्देश्य केवलमात्र इतना ही नही हमारी पुरानी एवं धार्मिक परंपरा बची रहे।

 नई पीढ़ि को झूलन का महत्व पता रहे और वो इसके प्रति अपना झुकाव एक धार्मिक परंपरा के रुप में बनाए रखे। इन्हीं सब उद्देश्यों को सामने रखकर मंदिर की कार्यकारिणी कमेटी लाखों रुपये खर्च कर झूलन उत्सव का आयोजन करती है। काफी संख्या में श्रद्धालु भी झूलन उत्सव देखने पहुंचते है। किसी-किसी दिन तो भीड़ को संभाल पाना भी एक चुनौती बनकर सामने खड़ी हो जाती है। पुलिस-प्रशासन का संपूर्ण सहयोग झूलन उत्सव के दिनों में रहता है। 

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