कोलकाता :- पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से बाहर हुए लाखों मतदाताओं की अपीलों के निपटारे में हो रही अत्यधिक देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यदि मामलों के निपटारे की यही रफ्तार रही, तो अगला विधानसभा चुनाव आ जाएगा लेकिन लोगों की अर्जियों का फैसला नहीं हो पाएगा।
कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर निपटारे का सटीक ब्योरा तलब किया है। याचिका में मांग की गई थी कि मुर्शीदाबाद और मालदा जैसे जिलों में, जहां आवेदकों की संख्या सर्वाधिक है, अतिरिक्त ट्रिब्यूनल का गठन किया जाए। उल्लेखनीय है कि राज्य में मतदाता सूची संशोधन के दौरान बाहर हुए लगभग 91 लाख लोगों में से करीब 27 लाख ने ट्रिब्यूनल का रुख किया था। वर्तमान में 24 जिलों में महज 18 ट्रिब्यूनल ही कार्यरत हैं, जिसके कारण अपीलों का अंबार लग गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में टिप्पणी की कि केवल ट्रिब्यूनल बना देना ही काफी नहीं है, बल्कि यह देखना भी अनिवार्य है कि व्यावहारिक रूप से कितने मामलों का समाधान हुआ। पीठ ने आयोग को सलाह दी कि आधुनिक तकनीक और ऑनलाइन डेटा अपडेट का सहारा लेकर प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। वहीं, आयोग के वकील ने भरोसा दिया कि अदालत के निर्देशों के अनुसार ट्रिब्यूनल के ढांचे में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को तय की गई है।
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