आसनसोल :- झारखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और डैम से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण दामोदर नदी के तटीय जिलों में एक बार फिर बाढ़ का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। मैथन डैम के 5 गेट खोलकर 92 हजार 624 एकड़ फीट तथा पंचेत जलाशय से 1 लाख 13 हजार 329 एकड़ फीट पानी छोड़ा जा रहा है। यह पानी अब दामोदर नदी से होते हुए दुर्गापुर बैराज की तरफ बढ़ रहा है। स्वाभाविक है कि दुर्गापुर बैराज पर भी पानी का दबाव बढ़ने से यहां से भी एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा जा सकता है। इससे पहले गत बुधवार को दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) द्वारा मैथन से 55 हजार क्यूसेक और पंचेत से 65 हजार क्यूसेक, यानी कुल 1 लाख 20 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। दुर्गापुर बैराज से भी 1 लाख 11 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण पूर्व बर्धमान, हुगली और हावड़ा जिलों के निचले इलाकों में जलभराव व बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जल संपद भवन स्थित नियंत्रण कक्ष पहुंचे और विभिन्न जिलों में वर्षा, नदियों के जलस्तर व संभावित संवेदनशील क्षेत्रों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समग्र जलभराव स्थिति की समीक्षा की। भारी बारिश के कारण राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। निचली दामोदर घाटी के कई इलाके जलमग्न हैं। खानाकुल, जांगीपाड़ा और उदयनारायणपुर इलाकों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बाढ़ की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंद्रु अधिकारी (CM Suvendu Adhikari) ने आपात बैठक की। इसके साथ ही उन्होंने यह संदेश भी दिया कि राज्य सरकार बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए कितनी तैयार है।
मूसलाधार बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ गया है और बांधों पर पानी का दबाव काफी बढ़ गया है। इस कठिन परिस्थिति में भी दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) ने बेहतरीन काम किया है, मुख्यमंत्री ने यह बात स्पष्ट रूप से कही। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बताया कि खानाकुल, जांगीपाड़ा और उदयनारायणपुर में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि डीवीसी ने पानी छोड़ने की मात्रा कम कर दी है, जिससे आज दोपहर के बाद प्रभावित इलाकों में जलस्तर घटने की संभावना है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने संदेश देते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी डीवीसी ने बहुत अच्छा काम किया है। उल्लेखनीय है कि तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान ममता बनर्जी हमेशा बाढ़ के लिए डीवीसी को कटघरे में खड़ा करती थीं। उस समय राज्य सरकार और डीवीसी के बीच एक तरह से 'सौतेला' व्यवहार देखने को मिलता था। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस बार डीवीसी को खुला प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) दिया है। उन्होंने कहा, अत्यधिक भारी बारिश और पानी के भारी दबाव के बावजूद कोई भी बांध नहीं टूटा। तृणमूल के शासनकाल में जुलाई-अगस्त के महीनों में मानसून की शुरुआत में ही कई बांध टूट जाया करते थे, और तब बालू की बोरियां फेंककर स्थिति पर काबू पाने की कोशिश की जाती थी। डीवीसी अधिकारियों के अनुसार, झारखंड और बिहार में हो रही बारिश के कारण मैथन व पंचेत डैम में बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए पानी छोड़ना अनिवार्य था।



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