35 साल बाद रानीगंज कन्हैया लाल सराफ स्मृति भवन के कार्यकारिणी समिति के चुनाव की प्रस्तुति के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाने के आश्वासन पर आमरण अनशन समाप्त
रानीगंज:रानीगंज शहर स्थित कन्हैया लाल भगवान दास सराफ स्मृति भवन की कार्यकारिणी समिति का चुनाव जल्द कराए जाने की मांग को लेकर चला आ रहा गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। सोमवार से अनशन पर बैठे राजा गोयनका ने श्री श्री सीताराम जी भवन एस्टेट के अध्यक्ष जुगल किशोर गुप्ता के आश्वासन के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। इस आंदोलन को स्थानीय मारवाड़ी समाज का समर्थन मिल रहा था और यह पूरे शहर में गहरा चर्चा का विषय बन गया था। मामले में हस्तक्षेप करते हुए श्री श्री सीताराम जी भवन एस्टेट के अध्यक्ष जुगल किशोर गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सराफ भवन, श्री श्री सीताराम जी भवन एस्टेट की ही एक अभिन्न यूनिट है। उन्होंने स्वीकार किया कि विगत 35 वर्षों से नियमों और परिचालन संबंधी कारणों के चलते यहाँ चुनाव नहीं हो पाए थे। जबकि एस्टेट की अन्य चारों यूनिटों की श्री सीताराम जी मंदिर, श्री महावीर व्यायाम समिति, मारवाड़ी युवा सम्मेलन और सीताराम जी भवन में लोकतांत्रिक पद्धति से नियमित चुनाव होते रहे हैं। जुगल किशोर गुप्ता ने समाज के हित को सर्वोपरि बताते हुए घोषणा की कि पुराने कागजातों का पुनरावलोकन कर निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके तहत समाज के प्रबुद्ध लोगों की उपस्थिति में एक 5 सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया जाएगा, जो अक्टूबर महीने के प्रथम सप्ताह तक सराफ भवन के चुनाव की दिशा और प्रक्रिया पर अपनी रिपोर्ट जमा देगी। इसके पश्चात चुनाव पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उनके इस आश्वासन से 35 सालों से लोकतांत्रिक व्यवस्था की राह देख रहे मारवाड़ी समाज में संतोष की लहर दौड़ गई है और अब जल्द ही कार्यकारिणी चुनाव की औपचारिक घोषणा होने की संभावना है। गौरतलब है कि सन् 1990 में कन्हैया लाल भगवान दास सराफ स्मृति भवन का निर्माण कराया गया था और इसके संचालन का दायित्व श्री श्री सीताराम जी भवन एस्टेट कमेटी ने स्वर्गीय काशीनाथ झुनझुनवाला एवं मनोज सराफ को देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी थी किन्तु कन्हैया लाल भगवान दास सराफ स्मृति भवन के निर्माण में मुख्य दाता से लेकर अन्य पहलुओं पर विशेष भूमिका अदा करने वाले स्वर्गीय बजरंग लाल जी सराफ के परिवार के किसी भी सदस्य को यह दायित्व नहीं सौंपा गया। जबकि श्री श्री सीताराम जी भवन एस्टेट की कार्यकारिणी कमेटी के साथ हुई समझौते के अनुसार स्वर्गीय बजरंग लाल जी सराफ के परिवार से 5 सदस्यों को शामिल करने की बात थी। परन्तु ऐसा नहीं हुआ। रहीं बात मनोज सराफ की तो यह नाम श्री श्री सीताराम जी भवन एस्टेट का निर्णय है, न कि स्वर्गीय बजरंग लाल जी सराफ के परिवार का। बस केवल टाइटल की वजह से यह कंफ्यूजन समाज में घर कर गया।
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