कौशिकी अमावस्या के बाद तारापीठ मंदिर का कायाकल्प शुरू, गर्भगृह से मां तारा के विग्रह का स्थानांतरण


बीरभूम :- प्रसिद्ध सिद्धपीठ तारापीठ मंदिर के जीर्णोद्धार का मार्ग प्रशस्त हो गया है। कौशिकी अमावस्या के बाद मंदिर के पुनरुद्धार एवं मरम्मत कार्य को ध्यान में रखते हुए आज रात मां तारा की मुख्य विग्रह को गर्भगृह से अस्थायी रूप से हटाकर समीप स्थित शिव मंदिर में स्थापित किया जाएगा। मंदिर की आधारशिला को मजबूत करने के साथ-साथ इसके आंतरिक और बाहरी परिसरों की संरचनात्मक मरम्मत के उद्देश्य से यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए तारापीठ मंदिर कमेटी के सचिव ने स्पष्ट किया कि नई कमेटी के गठन और कार्यभार संभालने के तुरंत बाद ही यह योजना बना ली गई थी कि वार्षिक कौशिकी अमावस्या का पावन पर्व निर्विघ्न संपन्न होने के पश्चात ही जीर्णोद्धार का कार्य आरंभ किया जाएगा। तय रूपरेखा के अनुसार, उत्सव के समाप्त होते ही मरम्मत प्रक्रिया की शुरुआत की जा रही है। उन्होंने आगे बताया कि प्राचीन स्थापत्य को सुरक्षित रखने के लिए निर्माण कार्य के दौरान विषय विशेषज्ञों और सिविल इंजीनियरों द्वारा दिए गए तकनीकी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा, जिससे मंदिर की प्राचीनता और पवित्रता अक्षुण्ण रहे।

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