मॉक ड्रिल के दौरान बीएसएफ जवानों ने कई चरणों में अभ्यास किया। पहले चरण में पुल के नीचे और आसपास के इलाके में संदिग्ध वस्तु या घुसपैठ की सूचना मिलने पर घेराबंदी और तलाशी अभियान का अभ्यास किया गया। दूसरे चरण में विस्फोट या पुल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश जैसी आपात स्थिति में त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन, घायलों को सुरक्षित निकालने और वैकल्पिक मार्गों से यातायात बहाल करने की प्रक्रिया का पूर्वाभ्यास किया गया। जवानों ने आधुनिक उपकरणों, स्निफर डॉग और बम डिस्पोजल टीम के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई को अंजाम दिया। इस दौरान आम लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और अफवाहों को रोकने की रणनीति पर भी जोर दिया गया।
गौरतलब है कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे चिकन नेक भी कहा जाता है, सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यह मात्र 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा एक संकरा भूभाग है जो भारत के शेष हिस्से को असम, अरुणाचल, नागालैंड समेत सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है। उत्तर में नेपाल, दक्षिण में बांग्लादेश और पूर्व में भूटान-चीन सीमा के करीब होने के कारण यह गलियारा राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से सबसे संवेदनशील माना जाता है। इसी कॉरिडोर से होकर सड़क, रेल और रणनीतिक आपूर्ति की मुख्य लाइनें गुजरती हैं। ऐसे में महानंदा जैसे महत्वपूर्ण पुलों की सुरक्षा देश की एकता और अखंडता से सीधे जुड़ी है।



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