कोलकाता/आसनसोल :- प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कोलकाता जोनल कार्यालय ने अवैध कोयला खनन और जबरन वसूली से जुड़े सिंडिकेट के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इस बड़े घोटाले की जांच को आगे बढ़ाते हुए, ईडी ने कोलकाता स्थित विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट में पांच आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दायर की है। इस चार्जशीट में मुख्य आरोपी चिन्मय मंडल और किरण खां के नाम शामिल हैं, जिन्हें केंद्रीय जांच एजेंसी ने इसी साल 9 फरवरी 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं वे चौंकाने वाले हैं।
ईडी की चार्जशीट और प्रेस रिलीज के अनुसार, यह पूरा सिंडिकेट पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर-आसनसोल क्षेत्र और उसके आसपास के इलाकों में एक संगठित नेटवर्क की तरह काम कर रहा था। इस गिरोह का जाल केवल अवैध कोयला खनन और चोरी तक ही सीमित नहीं था, बल्कि यह झारखंड से पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से कोयला लाने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए उसे बेचने के कारोबार में भी लिप्त था। ED ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि सबसे गंभीर बात यह है कि यह सिंडिकेट वैध डिलीवरी ऑर्डर (D.O.) धारकों, ट्रांसपोर्टरों और कोयला खरीदारों से व्यवस्थित तरीके से अवैध वसूली कर रहा था। स्थानीय भाषा में इसे 'जी टी' (GT), 'गुंडा टैक्स' या 'रंगदारी टैक्स' कहा जाता था। जांच में पता चला कि इस वसूली को छिपाने के लिए इसे लिफ्टिंग चार्ज, हैंडलिंग चार्ज या दान के रूप में दिखाया जाता था।
ED की प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह सिंडिकेट प्रति टन 275 रुपये से लेकर 1,500 रुपये तक की अवैध वसूली करता था, जो नीलामी में कोयले के वास्तविक मूल्य का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा था। इस भारी रंगदारी के कारण आवंटित कोयले का एक बड़ा हिस्सा उठाया ही नहीं जा सका, जिससे ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) को भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा। ईडी का अनुमान है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान इस सिंडिकेट ने रंगदारी के माध्यम से ही 650 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध की कमाई जुटाई है।
जांच के दौरान नवंबर 2025 और फरवरी 2026 में विभिन्न ठिकानों पर की गई छापेमारी में ईडी ने 17.57 करोड़ रुपये की नकदी, बैंक बैलेंस और अन्य कीमती सामान जब्त किया है। साथ ही, भारी मात्रा में कोयला और कोक का स्टॉक भी बरामद हुआ है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने इस काली कमाई को सफेद करने के लिए कई मुखौटा कंपनियों और प्रोप्राइटरशिप फर्मों का इस्तेमाल किया। फिलहाल, एजेंसी इस मामले के अन्य पहलुओं और जुड़े हुए व्यक्तियों की तलाश में अपनी जांच जारी रखे हुए है।



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