PM नरेंद्र मोदी ने Indian Navy को सौंपे स्वदेशी तकनीक से बने 3 अत्याधुनिक युद्धपोत


कोलकाता :- कोलकाता के रेड रोड पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गार्डन रीच पहुंचे। वहां उन्होंने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित तीन अत्याधुनिक युद्धपोतों का उद्घाटन किया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर आयोजित एक समारोह में इन तीनों युद्धपोतों को औपचारिक रूप से नौसेना को सौंप दिया गया। हालांकि, ये तीनों युद्धपोत मार्च महीने में ही नौसेना के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन इनका औपचारिक हस्तांतरण बाकी था, जिसे प्रधानमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पूरा किया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के साथ राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, राज्य प्रशासन के शीर्ष अधिकारी और नौसेना व वायुसेना के वरिष्ठ कमांडर भी उपस्थित थे।


प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटित किए गए इन तीन युद्धपोतों के नाम आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोषक और आईएनएस अग्रय हैं, जो अपनी अलग-अलग विशिष्टताओं के लिए जाने जाते हैं। आईएनएस दूनागिरी अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक से लैस एक फाइटर फ्रिगेट है, जो दुश्मन के रडार को चकमा देकर उस पर सटीक हमला करने में सक्षम है। वहीं, आईएनएस संशोषक समुद्र की गहराइयों में अचूक निगरानी करने में सक्षम एक विशाल सर्वे पोत है। तीसरा युद्धपोत आईएनएस अग्रय एक एंटी-सबमरीन वॉरशिप है, जो समुद्र के नीचे छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को पल भर में नष्ट करने की ताकत रखता है। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स में बने ये तीनों युद्धपोत भारतीय नौसेना की ताकत में भारी इजाफा करेंगे।



इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जब पूरा विश्व अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है, तब उन्हें पश्चिम बंगाल की इस महान भूमि पर आने का सौभाग्य मिला है, जिसने हमेशा भारत को एक नई दिशा दिखाई है और पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नौसैनिक शक्ति के बिना देश की ताकत का बढ़ना असंभव है और आत्मनिर्भर भारत ही नौसेना की असली शक्ति है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भविष्य को ध्यान में रखकर अपनी ताकत बढ़ा रहा है, क्योंकि जिस दिन देश रक्षा उपकरणों का निर्माता बनेगा, उसी दिन वह वैश्विक स्तर पर निर्णायक भूमिका में होगा। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और निवेश पर बल देते हुए कहा कि एक समय था जब भारत भारी मात्रा में हथियारों का आयात करता था, लेकिन आज देश रक्षा के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।

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