विधायकों के बाद अब TMC सांसदों में भी बगावत, BJP के संपर्क में 20 से ज्यादा सांसद

 

कोलकाता:  ‘‘दिल के फफूले जल उठे सीने के दाग से इस घर को आग लग गई घर के चराग से’’
महाताब राय ताबां की यह मशहूर लाइने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक उथल-पुथल पर एकदम से फिट बैठती है। 28 वर्षो के राजनीतिक संघर्ष, राजतिलक और तेजी से पतन की ओर बढ़ती तृणमूल कांग्रेस के लिए यह बाते कहीं न कहीं चरितार्थ होती दिख रही है। पश्चिम बंगाल की सत्ता से हटने के एक महीने के भीतर तृणमूल कांग्रेस के विधायक और सांसद पार्टी के विरुद्ध बगावत पर उतर आए है। यह महाबगावत तृणमूल कांग्रेस के अस्तित्व के लिए एक कड़ी चुनौती है। क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के साथ लोग ज्यादातर फायदे के लिए ही सटे हुए थे। इनका अब कहना है कि तृणमूल कांग्रेस एक आदर्श विहीन पार्टी है। जहां आदर्श न हो, यहां पर राजनीति की लंबी पारी कोई कैसे खेल सकता है ? महा बगावत के बीच 60 नवनिर्वाचित तृणमूल कांग्रेस विधायक पहले ही पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के विरुद्ध मोर्चा खोल चुके है और पार्टी गाइडलाइन से हटकर तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेती प्रतिपक्ष भी चुन लिए है। अब बारी है तृणमूल कांग्रेस सांसदों की। तृणमूल कांग्रेस के सांसद भी पार्टी की गाइडलाइन से बगावत करते हुए लोकसभा में भी विरोधी दल के नेता चुनने की रणनीति बना रहे है। सूत्रों का कहना है कि लोकसभा के लगभग 20 सांसद BJP के संपर्क में है और वे जल्द ही संसद में अपने दल के नेता के रूप में एक नया नाम लाएंगे। यानी राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री एवं TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी के पसंद के खिलाफ निर्णय लेंगे। पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में विरोधी दल के नेता के रूप में पार्टी ने शोभन देव चट्टोपाध्याय का नाम लाया था और उसे हटाकर बागी तृणमूल कांग्रेस विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विरोधी दल का नेता चुना। अब बागी सांसद भी डायमंड हार्बर के सांसद एवं तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को हटाकर संसद में अपना नया नेता चुन सकते है। इन सब अटकलों के बीच राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी Delhi रवाना हुए है। पार्टी में यह विभाजन पश्चिम बंगाल से लेकर Delhi तक पहुंच गया है। पहले विधायकों में विभाजन, फिर सांसदों में विभाजन। केवल लोकसभा ही नहीं राज्यसभा के सांसद भी BJP के संपर्क में आ रहे है। यानी लोकसभा के 28 तृणमूल सांसद और राज्यसभा के 13 तृणमूल सांसद कुल 41 सांसदों में कितने सांसद BJP के संपर्क में है, यह तो अभी स्पष्ठ नहीं हो पाया है। परन्तु सूत्रों का कहना है कि लोकसभा के 20 और राज्यसभा के 7 सांसद BJP के संपर्क में है। तृणमूल कांग्रेस के बीच केवल सांसद एवं विधायकों में ही बगावत हो रही है या पूरी पार्टी में ही बगावत है। इस प्रश्न का जवाब आने वाला समय ही दे पाएगा। परन्तु अटकले यह भी लगायी जा रही है कि पार्टी पूरी तरह से दो भागों में बंट चुकी है। एक तृणमूल कांग्रेस, दूसरा बगावती तृणमूल कांग्रेस। अब देखना यह है कि क्या तृणमूल कांग्रेस से हटकर कोई नया दल बनता है या नही। तृणमूल कांग्रेस की इस वर्तमान परिस्थिति के बारे में TMC के एक वरिष्ठ नेता से बातचीत करने पर उन्होंने शायरी के अंदाज में कहा.....‘‘दिल के फफूले जल उठे सीने के दाग से इस घर को आग लग गई घर के चराग से''। उन्होंने यह भी कहा कि जब पार्टी के राजकुमार, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पार्टी के One Man Show बन चुके अभिषेक बनर्जी को पार्टी के नेता, पार्टी के कार्यकर्ता एवं समर्थकों के साथ आसानी से मिलना-जुलना चाहिए था, ताकि जमीनी स्तर पर उसे पार्टी के लोग दिल से स्वीकार करे। ऐसे वक्त में वे मुख्यमंत्री का स्टेटस एंजॉय करने के चक्कर में पार्टी के बुरे दिनों के नेता, कार्यकर्ता एवं समर्थकों से ऐसी दूरी बन गयी, जिसकी भरपाई कर पाना संभव नहीं था।

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