कोलकाता :- कोलकाता पुलिस की साइबर सेल ने 'बांग्ला पोक्खो' संगठन के प्रमुख गर्ग चटर्जी को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर विधानसभा चुनाव के संदर्भ में उत्तेजक टिप्पणी करने और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने का गंभीर आरोप है। सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग ने गर्ग चटर्जी की गतिविधियों और बयानों का संज्ञान लेते हुए कोलकाता पुलिस के साइबर क्राइम विभाग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। चुनाव आयोग का मानना है कि इस तरह की अफवाहें चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। गर्ग चटर्जी हमेशा अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं खास तौर पर गर्ग चटर्जी और उनका संगठन पश्चिम बंगाल में रहने वाले हिंदी भाषियों को टारगेट करता रहा है। परंतु पिछले 15 साल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने गर्ग चटर्जी अथवा उनके संगठन पर कोई कार्रवाई नहीं की। लेकिन 15 साल बाद राज्य में सत्ता बदलने और बीजेपी की नई सरकार बनने के बाद उन पर शिकंजा कस गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कोलकाता के पुलिस कमिश्नर अजय नंदा ने बताया कि गर्गा चटर्जी को दो बार तलब किया गया था, लेकिन वे पेश नहीं हुए। इसके बाद मंगलवार को उन्हें कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया गया। सीपी ने कहा, "पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की है। वह (गर्गा) सोशल मीडिया पर बार-बार विभिन्न समुदायों को लेकर पोस्ट करते थे। उन पोस्ट में भेदभाव की भावना है। उस संबंध में दर्ज शिकायतों को भी मामले में जोड़ा जा रहा है।
चुनाव आयोग की इसी शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। गर्ग चटर्जी अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा और विवादों में रहते हैं, सत्ता परिवर्तन के ठीक बाद हुई इस गिरफ्तारी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पुलिस इस मामले में डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है ताकि अफवाहों के स्रोत का पता लगाया जा सके। जानकारी के अनुसार, उन्हें कल कोलकाता की संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उनकी हिरासत की मांग कर सकती है। इस बीच, 'बांग्ला पोक्খো' के कार्यकर्ताओं में इस गिरफ्तारी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है।


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