रानीगंज में राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा गायब होने पर बवाल, वामपंथियों और भाजपा कार्यकर्ताओं में धक्का मुक्की, पुलिस ने संभाला मोर्चा

रानीगंज :- लेखक, विद्वान और महापंडित राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा रहस्यमय तरीके से गायब किए जाने के विरोध में गुरुवार की शाम रानीगंज में वामपंथी संगठनों का प्रतिवाद जुलूस तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया। जनवादी लेखक संघ, गणतांत्रिक लेखक शिल्पी संघ और माकपा कार्यकर्ताओं ने घटना के विरोध में पंजाबी मोड़ के पास धरना प्रदर्शन शुरू किया। यह प्रदर्शन रानीगंज के भाजपा विधायक पार्थ घोष के निर्माणाधीन कार्यालय से थोड़ी दूरी पर हो रहा था, जहां पहले से मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं और वामपंथियों के बीच देखते ही देखते तीखी नोंक-झोंक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ने पर भारी पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह माहौल को नियंत्रित किया।

घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक पार्थ घोष ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मैंने खुद कल्चरल एंड लिटरेरी फोरम ऑफ़ बंगाल के अध्यक्ष को पत्र लिखकर राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति स्थापित करने की पहल की है। वहीं, माकपा के जिला सचिव गौरांग चटर्जी ने आरोप लगाया कि प्रतिमा गायब करने वालों के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने अशांति फैलाने की कोशिश की। माकपा नेता सुप्रियो राय, पार्षद नारायण बाउरी और हेमंत प्रभाकर ने दोषियों की गिरफ्तारी और पुरानी जगह पर नई मूर्ति की स्थापना की मांग की। 

उल्लेखनीय है कि पंजाबी मोड़ स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के पास वर्ष 1993 में स्थापित 9 फीट ऊंची प्रतिमा को गत 13 जुलाई की रात उपद्रवियों ने स्ट्रीट लाइटें और सीसीटीवी बंद कर 20 फीट ऊंचे मंच समेत ध्वस्त कर दिया था। इस बीच, 'कल्चरल लिटरेरी फोरम ऑफ बंगाल' के अध्यक्ष व पांडवेश्वर के विधायक जितेंद्र तिवारी ने बताया कि विधायक पार्थ घोष की पहल पर फोरम ने राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा को पुनः स्थापित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि महापंडित का ऐतिहासिक योगदान कभी समाप्त नहीं किया जा सकता।

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