प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बुधवार को एक स्थानीय परिवार मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचा था। पूजा के दौरान जब परिवार की एक महिला ने शिवलिंग पर जल चढ़ाया, तो उनका दावा है कि पानी सामान्य रूप से नीचे नहीं बहा। इसके बाद जब चम्मच से जल अर्पित किया गया, तो पानी चम्मच से गायब होता हुआ महसूस हुआ। इसी दौरान परिवार की एक बच्ची ने नंदी बाबा की प्रतिमा के समीप चम्मच से पानी रखा, तो वहां से भी पानी गायब हो गया। देखते ही देखते यह खबर पूरे इलाके में आग की तरह फैल गई और लोग इसे दैवीय चमत्कार से जोड़कर देखने लगे।
हालांकि, इस घटना को लेकर अब तक कोई आधिकारिक वैज्ञानिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन विज्ञान ऐसी घटनाओं को अलौकिक मानने के बजाय विशुद्ध रूप से भौतिकी और रसायनों का खेल मानता है। विज्ञान का रोचक तथ्य यह है कि जब भी किसी पत्थर या संगमरमर की मूर्ति पर जल या दूध चढ़ाया जाता है, तो 'केशिकात्व' यानी कैपिलरी एक्शन के कारण मूर्ति के सूक्ष्म छिद्र पानी को अपनी ओर तेजी से खींच लेते हैं। इसके अलावा, सूखी या खुरदरी सतह पर पानी चम्मच से लगाते ही सतह तनाव और गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से बहुत पतली परत के रूप में तेजी से फैल जाता है और वाष्पीकृत होकर अदृश्य प्रतीत होता है। बर्तन को मूर्ति से एक खास कोण पर सटाने से भी पानी सतह के नीचे चुपचाप बह जाता है, जिससे देखने वाले को लगता है कि मूर्ति पानी पी रही है।




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