विधानसभा चुनाव प्रचार से 'गायब' क्यों है MP शत्रुघ्न सिन्हा ? फिर लगे ‘लापता’ होने के पोस्टर

आसनसोल :- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर राज्य में राजनीतिक पारा अपने चरम पर है। आगामी 23 अप्रैल को पश्चिम बर्दवान जिले की 9 महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर मतदान होना है, चुनाव प्रचार समाप्त होने में अब सिर्फ 5 दिन बचे हैं। इसके बावजूद आसनसोल लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस सांसद और मशहूर अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की  चुनाव प्रचार में अनुपस्थिति ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। इसी बीच, आसनसोल में सांसद शत्रुघ्न सिन्हा के खिलाफ एक बार फिर विवादित पोस्टर देखे गए हैं, जिनमें उन्हें 'लापता' बताया गया है। इन पोस्टरों पर 'शेम' (SHAME) और 'विकास कहाँ है ?' जैसे तीखे नारों के जरिए विकास की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। गौरतलब है कि आसनसोल लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले शत्रुघ्न सिन्हा को तृणमूल कांग्रेस ने अपना स्टार प्रचारक बनाया है, इसके बावजूद वे पिछले काफी समय से चुनाव प्रचार अभियान से पूरी तरह नदारद हैं।

जानकारी के अनुसार, सांसद आखिरी बार गत 23 मार्च को जामुड़िया में पार्टी प्रत्याशी हरे राम सिंह के समर्थन में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में नजर आए थे। उस दौरान उनकी गाड़ी पर नीली बत्ती लगी होने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। उस घटना के बाद से ही वे किसी भी सार्वजनिक चुनावी कार्यक्रम में दिखाई नहीं पड़े हैं। हैरानी की बात यह है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी दुर्गापुर, पांडेश्वर, आसनसोल और बाराबनी जैसे क्षेत्रों में जनसभाएं कर चुके हैं, लेकिन इन महत्वपूर्ण मंचों पर भी सांसद की गैरमौजूदगी ने पार्टी कार्यकर्ताओं के भीतर असंतोष और कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है।

शत्रुघ्न सिन्हा की इस खामोशी के उलट, बर्दवान-दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्र के तृणमूल सांसद कीर्ति आजाद चुनाव प्रचार में पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं। कीर्ति आजाद न केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रमुख मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रख रहे हैं, बल्कि अपने क्षेत्र के साथ-साथ रानीगंज और अन्य इलाकों में भी प्रत्याशियों के लिए माहौल बनाने में जुटे हैं। बता दें कि आसनसोल लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत 7 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें से वर्ष 2021 के चुनाव में आसनसोल दक्षिण और कुल्टी सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। ऐसे में, स्टार प्रचारक होने के नाते सांसद सिन्हा का प्रचार से दूर रहना तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, विशेषकर तब जब विपक्षी दल इसे मुद्दा बनाकर जनता के बीच 'विकास' और 'सांसद की सक्रियता' पर सवाल उठा रहे हैं।

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