'होल्डिंग सेंटर' के डर से खुद बांग्लादेश भाग रहे घुसपैठिए, हाकीमपुर बॉर्डर पर बढ़ी भीड़


कोलकाता :- पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों की तस्वीरों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बंगलादेशी घुसपैठियों व रोहिंग्या के लिए डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट की नीति अपनाई हैं। उत्तर 24 परगना के बशीरहाट स्थित हकीमपुर सीमा पर एक बार फिर अवैध प्रवासियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के चेकपोस्ट के पास मंगलवार सुबह से ही बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठिए अपनी ट्रली, लोटा-कंबल और जरूरी सामान समेटकर जमा हो गए हैं। ये सभी बांग्लादेशी नागरिक और संदिग्ध रोहिंग्या कानूनी कार्रवाई के डर से खुद ही वापस बांग्लादेश लौटने की फिराक में हैं। हकीमपुर चेकपोस्ट के पास बने छावनी क्षेत्र में सोमवार को भी लगभग 100 बांग्लादेशी घुसपैठिए जमा थे, जबकि कई अन्य बाहर इंतजार कर रहे थे। घुसपैठियों में वापस लौटने की यह जल्दबाजी राज्य की नई भाजपा सरकार द्वारा संदिग्धों को रखने के लिए हर जिले में 'होल्डिंग सेंटर' बनाने के निर्देश के बाद शुरू हुई है। इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के समय भी हकीमपुर सीमा पर देश छोड़ने की ऐसी ही होड़ दिखी थी, जो तत्कालीन तृणमूल सरकार के विरोध के बाद थम गई थी। लेकिन अब सरकार बदलते ही हकीमपुर सीमा फिर से प्रवासियों की वापसी का मुख्य केंद्र बन गई है।


प्रशासनिक स्तर पर इस फैसले को अमलीजामा पहनाना भी शुरू कर दिया गया है। इसी कड़ी में मालदा जिले के इंग्लिशबाजार शहर के चंदनपार्क इलाके में पहला आधिकारिक 'होल्डिंग सेंटर' शुरू कर दिया गया है। गाजोल थाने के पांडुआ इलाके से अवैध रूप से सीमा पार करने के आरोप में पकड़े गए 9 बांग्लादेशी नागरिकों को कड़ी सुरक्षा के बीच इस केंद्र में रखा गया है, जिनमें 3 महिलाएं और 6 नाबालिग बच्चे शामिल हैं। इस सेंटर की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों के साथ ही सशस्त्र पुलिस बल, सिविल डिफेंस और सिविक वॉलेंटियर्स को चौबीसों घंटे तैनात किया गया है। वहीं, मुर्शिदाबाद जिले के लालगोला स्थित 'पद्मा भवन' की तीसरी मंजिल पर भी एक अस्थायी होल्डिंग सेंटर बनाया गया है, जहाँ वर्तमान में पकड़े गए तीन बांग्लादेशी नागरिकों को रखकर उनके दस्तावेजों की जांच की जा रही है। 

नवान्न (राज्य सचिवालय) के नए निर्देशों के अनुसार, संदिग्धों को इन केंद्रों में 30 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है। सरकार के इस कड़े प्रशासनिक रुख ने घुसपैठियों के बीच हड़कंप मचा दिया है और वे कानूनी शिकंजे से बचने के लिए खुद ही हकीमपुर जैसी सीमाओं के जरिए वापस भाग रहे हैं।

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