रानीगंज :- रानीगंज के बांसड़ा कोलियरी इलाके में ईसीएल के प्रस्तावित सी.एम. (कंटीन्यूअस माइनिंग) कोयला खदान परियोजना के खिलाफ स्थानीय निवासियों ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को बड़ी संख्या में स्थानीय पुरूष व महिलाएं सड़कों पर उतर आए और कोयला उत्पादन बंद कराकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा यहीं नहीं रुका, उन्होंने खदान से होने वाले कोयला परिवहन और साइडिंग के कामकाज को भी पूरी तरह ठप कर दिया।
प्रदर्शन का नेतृत्व आमरासोता ग्राम पंचायत के प्रधान और माकपा नेता संजय हेम्ब्रम कर रहे थे। उन्होंने आंदोलन की मुख्य वजहों को स्पष्ट करते हुए कहा कि बांसड़ा कोलियरी में प्रस्तावित इस कंटीन्यूअस माइनिंग प्रोजेक्ट को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि यदि यह प्रोजेक्ट लागू होता है, तो स्थानीय आबादी को बड़े पैमाने पर विस्थापन का दंश झेलना पड़ेगा। बांसड़ा मुख्य रूप से एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है, और इस नई परियोजना के कारण पूरे इलाके का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।
संजय हेम्ब्रम ने बताया कि इस परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध पिछले साल से ही लगातार जारी है। इसी सिलसिले में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के बांसड़ा कोलियरी प्रबंधन के साथ पूर्व में बैठकें भी हो चुकी हैं। बीते 1 मई को हुई बैठक में भी स्थानीय प्रतिनिधियों ने ईसीएल अधिकारियों के समक्ष अपनी आपत्तियां और चिंताएं स्पष्ट रूप से रखी थीं। ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचेगा और प्रदूषण का स्तर अत्यधिक बढ़ जाएगा। कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से कोयले की ढुलाई होने के कारण बांसड़ा के आदिवासी पाड़ा, भुइयां पाड़ा और आसपास के अन्य रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों का जीवन दुश्वार हो जाएगा। इसी बड़ी असुविधा और विस्थापन के डर से नाराज ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। हालांकि इस आंदोलन के संदर्भ में ईसीएल अधिकारियों के तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।




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