स्थानीय भाजपा नेतृत्व का आरोप है कि गौतम घोष अजय नदी से अवैध बालू खनन और उसकी तस्करी करने वाले एक बहुत बड़े नेटवर्क का सबसे प्रभावशाली चेहरा था। दिन-दहाड़े नदी का सीना चीरकर बालू की लूट मची रहती थी, लेकिन प्रशासन की आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी। वहीं, स्थानीय लोगों के एक बड़े वर्ग का दावा है कि गौतम घोष कई तरह के अवैध कारोबारों में लिप्त था और इन सब के पीछे तृणमूल के बड़े नेताओं का हाथ था। बालू ही नहीं, बल्कि खनन क्षेत्रों से अवैध रूप से कोयला निकालकर उसे ठिकाने लगाने वाले गिरोहों पर भी उसका सीधा नियंत्रण था। इलाके के लोग उसके रसूख और खौफ के कारण मुंह खोलने से डरते थे।
भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि साल 2021 के विधानसभा चुनाव के पहले और बाद में विरोधी दल के कार्यकर्ताओं पर हमले करने, उन्हें डराने-धमकाने और मतदाताओं को प्रभावित करने में गौतम घोष की बेहद सक्रिय भूमिका थी। विपक्ष के एक नेता के अनुसार, वह सिर्फ तृणमूल का एक अंचल अध्यक्ष नहीं था, बल्कि इलाके में फल-फूल रहे पूरे सिंडिकेट राज का सरगना था, जिसके इशारे पर सब कुछ होता था। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद बुधवार रात को पुलिस ने गोगला इलाके से इस बाहुबली नेता को दबोच लिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ पहले से ही कई शिकायतें दर्ज थीं और पुख्ता सबूत मिलने के बाद ही यह कार्रवाई की गई है।

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