पश्चिम बर्दवान जिले में रिकॉर्ड 90.33% वोटिंग किसे फायदा-किसे नुकसान ? 4 मई को रिजल्ट

आसनसोल :- पश्चिम बर्दवान जिले की 9 विधानसभा सीटों के लिए गुरुवार को हुए मतदान में मतदाताओं ने अभूतपूर्व उत्साह दिखाते हुए रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग की है। जिले में कुल मतदान का प्रतिशत 90.33% दर्ज किया गया है, जो लोकतंत्र के प्रति लोगों के भारी जुड़ाव को दर्शाता है। विधानसभा वार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा मतदान पांडबेश्वर केंद्र में 92.13% दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम मतदान आसनसोल उत्तर निर्वाचन क्षेत्र में 88.29% रहा। जिले की अन्य प्रमुख सीटों में रानीगंज में 90.42%, जमुड़िया में 91.79%, बाराबनी में 91.05%, और कुल्टी में 89.92% मतदान हुआ। वहीं, दुर्गापुर पूर्व और पश्चिम में क्रमशः 90.06% और 90.27% तथा आसनसोल दक्षिण में 89.73% वोटिंग हुई है।

पश्चिम बर्दवान जिले के चुनावी इतिहास को देखें तो वर्ष 2016 में पश्चिम बर्द्धवान में 77.59% मतदान हुआ था, जिसमें तृणमूल कांग्रेस ने 5, वाम मोर्चे ने 3 और कांग्रेस ने 1 सीट पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा का खाता नहीं खुल सका था। इसके विपरीत, वर्ष 2021 में मतदान प्रतिशत गिरकर 72.88% रह गया था, लेकिन राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए थे। उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 6 सीटों पर कब्जा किया था, जबकि भाजपा ने जबरदस्त बढ़त बनाते हुए 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी।


विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मतदान प्रतिशत में हुई भारी वृद्धि (90% के पार) सत्ता विरोधी लहर और सत्ता के पक्ष में गोलबंदी, दोनों की ओर इशारा कर सकती है। अक्सर मतदान का इतना ऊंचा स्तर किसी बड़े बदलाव या बहुत कड़े मुकाबले का संकेत होता है। बढ़ा हुआ वोटिंग प्रतिशत जहां भाजपा के लिए नई उम्मीदें जगा सकता है, वहीं तृणमूल कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे और महिला वोट बैंक के भरोसे जीत बरकरार रखने की उम्मीद लगाए बैठी है। जीत-हार का यह सस्पेंस अब 4 मई को होने वाली मतगणना के साथ ही समाप्त होगा, जब यह साफ हो जाएगा कि जनता ने इस भारी मतदान के जरिए किसके सिर पर जीत का सेहरा बांधा है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 सीटों पर हुए मतदान ने नया इतिहास रच दिया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस चरण में कुल 93% वोटिंग हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मतदान का यही रुझान दूसरे और अंतिम चरण की 142 सीटों पर भी बना रहता है, तो यह पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे अधिक 'वोटर टर्नआउट' दर्ज किया जाएगा। तुलनात्मक रूप से देखें तो वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में कुल 82% मतदान हुआ था, जिसकी तुलना में इस बार का आंकड़ा काफी बड़ा उछाल दिखा रहा है।

पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास और मतदान के पैटर्न पर नजर डालें तो आजादी के बाद से अब तक राज्य में कुल 17 विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें मात्र 4 बार सत्ता परिवर्तन देखा गया है। आंकड़ों का एक दिलचस्प पहलू यह है कि इनमें से तीन बार सत्ता तब बदली जब वोटिंग प्रतिशत में 4.5% से अधिक की वृद्धि या कमी दर्ज की गई। हालांकि, साल 2011 का चुनाव इसका अपवाद था, जब ममता बनर्जी ने वामपंथियों के 34 साल पुराने किले को ढहाया था; उस समय मतदान में मात्र 2.4% की बढ़ोत्तरी हुई थी। ऐसे में इस बार पहले चरण में दर्ज हुआ भारी मतदान सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर रहा है कि क्या यह सत्ता विरोधी लहर का नतीजा है या सत्ता को बनाए रखने के लिए जनता का भारी समर्थन।

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