कोलकाता :- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण को लेकर चुनाव आयोग ने एक बेहद महत्वपूर्ण घोषणा की है। राज्य के 44 हजार 376 बूथों पर गुरुवार को हुए मतदान के बाद आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी बूथ पर दोबारा वोटिंग यानी पुनर्मतदान नहीं कराया जाएगा। आयोग के इस फैसले ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है, जिनमें मतदान के दौरान गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही थी। दिलचस्प बात यह है कि बंगाल के साथ-साथ तमिलनाडु की 75 हजार से ज्यादा बूथों पर भी दोबारा मतदान की जरूरत नहीं समझी गई है।
चुनाव से पहले आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि अगर कहीं भी मतदाताओं को डराने या धांधली की शिकायत मिली, तो वहां तुरंत पुनर्मतदान के आदेश दिए जाएंगे। हालांकि, 1951 के जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत मिली शक्तियों और जमीनी हकीकत का आकलन करने के बाद आयोग इस नतीजे पर पहुंचा है कि गुरुवार को हुई वोटिंग प्रक्रिया पूरी तरह संतोषजनक रही। हालांकि कांग्रेस जैसे राजनीतिक दलों ने मुर्शिदाबाद के भरतपुर और बरहमपुर जैसे इलाकों में अनियमितताओं के आरोप लगाए थे और मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल से लिखित शिकायत भी की थी, लेकिन आयोग ने इन शिकायतों को पुनर्मतदान के पैमाने पर पर्याप्त नहीं माना।
इस बीच, पहले चरण के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाने वाले हैं। राज्य में भारी उत्साह के साथ रिकॉर्ड 92.88 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। इसमें कूचबिहार जिला सबसे आगे रहा, जहां मतदान का प्रतिशत 96 को पार कर गया। वहीं दक्षिण दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और मालदा जैसे जिलों में भी 94 प्रतिशत से अधिक वोट पड़े। हालांकि दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में मतदान की रफ्तार थोड़ी धीमी रही और आंकड़ा 90 फीसदी के नीचे रहा, लेकिन बाकी बंगाल ने भारी संख्या में घर से निकलकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनाव आयोग का यह फैसला निष्पक्ष चुनाव की दिशा में एक बड़ी मुहर माना जा रहा है।



0 Comments